देहरादून। आर्थिक संकट से जूझ रहे उत्तराखंड परिवहन निगम यानी रोडवेज के सामने अब ड्राइवरों की भारी कमी एक बहुत बड़ी चुनौती बन गई है। एक ओर जहां रोडवेज को नए ड्राइवर मिल नहीं पा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर समय पर वेतन नहीं मिलने से नाराज होकर पुराने और एजेंसी के ड्राइवर नौकरी छोड़ते जा रहे हैं।
इस गंभीर स्थिति का सीधा असर बसों के संचालन पर पड़ रहा है, जिसकी वजह से कई रूटों पर रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति को संभालने के लिए रोडवेज ने बीते अप्रैल महीने में आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से कुल 286 ड्राइवरों की भर्ती निकाली थी, जिसके मुकाबले अब तक केवल करीब 100 ड्राइवर ही उपलब्ध हो पाए हैं।
यानी वर्तमान स्थिति के अनुसार अभी भी रोडवेज में 186 ड्राइवरों की भारी जरूरत बनी हुई है, जबकि पिछले एक साल के भीतर एजेंसी, संविदा और विशेष श्रेणी के 30 से ज्यादा ड्राइवरों ने अपनी नौकरी छोड़ दी है। ड्राइवरों का कहना है कि समय पर वेतन न मिलने और एजेंसी स्तर पर भुगतान की दिक्कतों के कारण रोडवेज में नौकरी करना उनके लिए बेहद मुश्किल हो गया है।
वेतन में देरी और आर्थिक तंगी के चलते नौकरी छोड़ने वाले चालकों के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें विकासनगर के ग्रामीण डिपो में करीब दो साल तक काम करने वाले सुनील का महीने में करीब 32 हजार रुपये वेतन बनता था, लेकिन भुगतान अक्सर तीन महीने बाद मिलता था, जिससे परेशानी हुई।
वहीं नवाबगढ़ के चेतराम ने ग्रामीण डिपो में लगभग सात महीने तक सेवा देने के बाद पिछले साल अगस्त में नौकरी छोड़ दी और अब डाकपत्थर रूट पर निजी वाहन चला रहे हैं; इसके अलावा रुड़की के अशोक ने ग्रामीण डिपो में एक साल तक काम करने के बाद इस साल फरवरी में वेतन समय पर न मिलने से उपजी आर्थिक परेशानियों के चलते नौकरी छोड़ दी।

