देश के 254 शहरों में से केवल 131 के पास सुरक्षित श्रेणी की आबोहवा, मंडराया बड़ा जनस्वास्थ्य खतरा

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देहरादून। सर्दियों की दस्तक के साथ ही देशभर में वायु प्रदूषण का संकट एक बार फिर विकराल रूप लेने लगा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश के 254 निगरानी वाले शहरों में से आधे से अधिक यानी 131 शहरों में वायु गुणवत्ता बेहद चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुकी है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से लेकर हरियाणा, राजस्थान और ओडिशा तक फैले बड़े और छोटे शहर इस जहरीली हवा की चपेट में आ चुके हैं।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की इस रिपोर्ट ने प्रशासनिक हलकों में खलबली मचा दी है। वर्तमान स्थिति यह है कि देश के केवल 123 शहरों में ही वायु गुणवत्ता संतोषजनक या अच्छी श्रेणी में दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह स्थिति आने वाले दिनों में एक बड़े जनस्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है।

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प्रदूषण के मामले में सबसे भयावह स्थिति राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के शहरों की बनी हुई है। देश के सर्वाधिक प्रदूषित पांच शहरों में चार उत्तर प्रदेश के और एक हरियाणा का है। आंकड़ों के अनुसार, गुरुग्राम के पास स्थित पंचगांव में एयर क्वालिटी इंडेक्स 378 तक पहुंच गया है, जो देश में सर्वाधिक है। इसके अलावा हापुड़ में 328, बड़ौत में 328, बागपत में 282 और मेरठ में AQI 281 दर्ज किया गया है।

मैदानी इलाकों के साथ-साथ देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में भी हवा का हाल बेहद खराब है। मुंबई की बिगड़ती आबोहवा पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि यह शहर प्रदूषण के मामले में अब दिल्ली से भी आगे निकल चुका है। अदालत ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि जब लाखों नागरिक जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं, तब इस पर नियंत्रण रखने वाले जिम्मेदार अधिकारी आखिर चैन की नींद कैसे सो सकते हैं।

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बॉम्बे हाई कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अपने कर्तव्यों का निर्वहन न करने वाले अधिकारियों को सीधे तौर पर जवाबदेह ठहराया जाएगा। अदालत ने स्थानीय नगर निकायों, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पुलिस प्रशासन को आड़े हाथों लिया। कोर्ट ने कहा कि त्योहारों के दौरान शोर और प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए जारी आदेशों को जमीन पर लागू करने में ये एजेंसियां पूरी तरह नाकाम साबित हुई हैं।

प्रदूषण विशेषज्ञों के मुताबिक, हवा को जहरीला बनाने में पीएम 2.5 और पीएम 10 के सूक्ष्म कणों की मुख्य भूमिका है। धूल और धुएं से भरे ये महीन कण सांस के जरिए सीधे इंसानी फेफड़ों में उतरते हैं, जिससे गंभीर बीमारियां होना तय माना जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, देश के 17 शहरों में हवा खराब और 3 शहरों में बेहद खराब श्रेणी में रिकॉर्ड की गई है।

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इस राष्ट्रीय संकट के बीच उत्तराखंड के देहरादून से राहत भरी तस्वीर सामने आई है। देहरादून में वायु गुणवत्ता अभी भी सुरक्षित श्रेणी में है, जहां बृहस्पतिवार को AQI केवल 56 दर्ज किया गया। भौगोलिक स्थिति और हरियाली के चलते पर्वतीय क्षेत्र फिलहाल इस जहरीले कोहरे और प्रदूषण के प्रकोप से सुरक्षित हैं, लेकिन मैदानी इलाकों के लिए यह स्थिति खतरे की बड़ी घंटी है।