कुंजापुरी मेला विवाद: दलेर मेहंदी के समर्थन में उतरे नामी सितारे, अनुपम खेर बोले- ‘मंच पर जलील करना पूरी तरह अनुचित’

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देहरादून। कुंजापुरी मेले की सांस्कृतिक संध्या के दौरान प्रसिद्ध पंजाबी गायक दलेर मेहंदी को मंच पर फटकार लगाने के मामले में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल अब बुरी तरह घिर गए हैं। बॉलीवुड कलाकारों के कड़े विरोध और सोशल मीडिया पर मामला तूल पकड़ने के बाद अब कैबिनेट मंत्री के तेवर नरम पड़ते नजर आ रहे हैं।

इस पूरे हाई-प्रोफाइल विवाद में बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर और राजपाल यादव ने खुलकर दलेर मेहंदी का पक्ष लिया है। दोनों कलाकारों ने सोशल मीडिया के माध्यम से कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के इस तरह के व्यवहार पर गहरी आपत्ति जताई है। वहीं, उत्तराखंड कांग्रेस ने भी इसे देवभूमि की संस्कृति के खिलाफ बताते हुए मंत्री से सार्वजनिक माफी की मांग की है।

अभिनेता अनुपम खेर ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि वह दलेर मेहंदी को पिछले 25-30 सालों से व्यक्तिगत रूप से जानते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पिछले दो-तीन वर्षों से दलेर की तबीयत ठीक नहीं चल रही है, फिर भी वह सर्जरी के बाद अपने वादे के मुताबिक कार्यक्रम में पहुंचे थे।

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अनुपम खेर ने आगे कहा कि हो सकता है दलेर जी ने मंच पर लिपसिंग की हो, लेकिन इस तरह सार्वजनिक रूप से मंच पर उन्हें जलील करना और आरोप लगाना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने कहा कि एक वरिष्ठ कलाकार और उसके जीवन का हमेशा सम्मान होना चाहिए।

इस मामले में अभिनेता राजपाल यादव ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मंच पर किसी कलाकार के साथ अशोभनीय भाषा का प्रयोग करना या मारपीट की बातें करना बिल्कुल भी शोभा नहीं देता। राजपाल ने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे मंत्री जी ने कला को खरीद लिया हो, जबकि कला कभी बिकती नहीं है।

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चतुर्दिक घिरने के बाद कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने भी अपनी सफाई दी है। मंत्री ने कहा कि उन्हें लगा था कि दलेर मेहंदी नशे की हालत में हैं, हालांकि वह नशा किस चीज का था, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि इतने बड़े कलाकार का मेडिकल टेस्ट नहीं कराया जा सकता था।

मंत्री सुबोध उनियाल ने अपनी बात रखते हुए कहा कि यदि दलेर मेहंदी की तबीयत ठीक नहीं थी, तो उन्हें या तो आयोजकों को बताना चाहिए था या कार्यक्रम में नहीं आना चाहिए था। उन्होंने खुलासा किया कि इस प्रस्तुति के लिए 35 लाख रुपये दिए गए थे और ठहरने का विशेष प्रबंध किया गया था।

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मंत्री ने सफाई देते हुए आगे कहा कि उनका उद्देश्य संगीत या किसी कलाकार को बदनाम करना बिल्कुल नहीं था। लेकिन जब लगातार 45 मिनट तक परफॉर्मेंस नहीं हो पाई, तब एक जनप्रतिनिधि होने के नाते उन्होंने मंच पर जाकर अपनी बात रखी।

दूसरी ओर, उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश महासचिव अमरजीत सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि हजारों दर्शकों के सामने किसी आमंत्रित कलाकार का अपमान करना उत्तराखंड की ‘अतिथि देवो भव’ की परंपरा के सर्वथा विपरीत है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि यदि मंत्री को कोई भी शिकायत थी, तो वह आयोजकों के माध्यम से जांच करवा सकते थे। सार्वजनिक मंच से इस तरह के आरोप लगाकर किसी प्रतिष्ठित कलाकार की मानहानि करना एक जनप्रतिनिधि के आचरण के बिल्कुल अनुकूल नहीं है।