उत्तराखंड में ग्रीन सेस वसूलने की व्यवस्था हुई फेल: कैमरे भटके और सर्वर अटका, सरकार को करोड़ों का नुकसान

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देहरादून। उत्तराखंड की सड़कों पर बाहरी राज्यों के वाहनों की बढ़ती आवाजाही से सरकार को करोड़ों रुपये का ग्रीन सेस मिलना था, लेकिन तकनीकी कमियों के कारण वसूली का पूरा सिस्टम जवाब दे गया है। परिवहन विभाग द्वारा फरवरी महीने में बाहरी राज्यों के वाहनों से ग्रीन सेस वसूलने की व्यवस्था लागू की गई थी, जिसके लिए 37 जगहों पर एएनपीआर कैमरे लगाए गए थे। राज्य की सीमा में प्रवेश करते ही कैमरा वाहन की नंबर प्लेट की तस्वीर लेता है, लेकिन सर्वर और कैमरों की तकनीकी समस्याओं के चलते यह प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

इस तकनीकी खामी के कारण फरवरी से सितंबर तक संभावित राजस्व के मुकाबले महज 20 करोड़ रुपये ही ग्रीन सेस के रूप में जमा हो सके हैं। स्थिति यह है कि कई जगहों पर कैमरों की नजर चूक रही है तो कहीं सर्वर में जगह की कमी के कारण नंबर प्लेट की तस्वीरें प्रोसेस नहीं हो पा रही हैं। इसके अलावा, बिजली गुल होने पर पूरी व्यवस्था ठप हो जाती है, जिससे राज्य के खजाने को भारी चपत लग रही है।

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व्यवस्था में सबसे बड़ी दिक्कत फोटो डेटा के स्टोरेज को लेकर सामने आ रही है, क्योंकि सर्वर में पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण फिलहाल केवल दो दिन तक का ही डेटा रखा जा रहा है। इससे सभी वाहनों की तस्वीरों को समय पर प्रोसेस करने में भारी परेशानी आ रही है। आईटीडीए स्तर पर प्रयास के बाद परिवहन विभाग ने अपना डेटा सेंटर बनाने की योजना बनाई थी, लेकिन वह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। अब एक संस्था के माध्यम से डेटा को क्लाउड पर ले जाने की तैयारी चल रही है।

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तकनीकी दिक्कतों को दूर करने के लिए अपर परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह ने बताया कि जिन जगहों पर कैमरों की संख्या और आसपास से वाहनों के निकाले जाने की संभावना रहती है, वहां पर एनपीआर कैमरों की संख्या बढ़ाई जाएगी। साथ ही, कई स्थानों पर एक ही कैमरा कवरेज में वाहनों की तस्वीर ले रहा है, जिसके दायरे से बाहर से गुजरने वाले वाहनों की फोटो नहीं मिल पाती है। बिजली आपूर्ति बाधित होने पर भी कैमरे काम नहीं कर पाते हैं, लेकिन अब बिजली जाने पर कैमरे संचालित रहें, इसकी भी पुख्ता व्यवस्था की जा रही है।

इस संबंध में उप परिवहन आयुक्त शैलेश तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि सिस्टम को पूरी तरह मजबूत किया जा रहा है। यदि पूरी क्षमता से यह व्यवस्था संचालित होती तो राजस्व इससे कई गुना अधिक प्राप्त हो सकता था। परिवहन विभाग के इन प्रयासों से उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में ग्रीन सेस की वसूली में आ रही तकनीकी बाधाएं दूर हो सकेंगी और राजस्व में सुधार होगा।

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राज्य में सार्वजनिक अवकाश और पर्यटन सीजन के दौरान बाहरी वाहनों की संख्या कई गुना तक बढ़ जाती है, जिससे व्यवस्था पर और अधिक दबाव पड़ता है। दो अक्टूबर की बात करें तो केवल कैंची धाम में 35 हजार वाहन पहुंचे थे, जबकि आशारोड़ी में 20 हजार से अधिक वाहन रिपोर्ट हुए थे। इसी दिन कुठाल गेट पर ही सुबह 9:15 से 11:15 तक 1500 वाहन पहुंचे थे और नारसन बार्डर पर 20,245 वाहन रिपोर्ट हुए थे, जिनमें बड़ी संख्या अन्य राज्यों के वाहनों की भी थी।