देहरादून। उत्तराखंड में महिलाओं को अपना कारोबार आगे बढ़ाने में मदद करने वाली ‘भुली योजना’ के तहत अब तक 6,327 महिला उद्यमियों ने पंजीकरण करा लिया है। इस योजना के तहत चुनी जाने वाली महिलाओं को व्यवसाय विस्तार के लिए 18 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद दी जाएगी। वित्तीय सहायता के साथ ही आईआईएम काशीपुर की ओर से चुनी गई महिला उद्यमियों को कारोबार से जुड़ा विशेष प्रशिक्षण और तकनीकी मदद भी दी जाएगी।
दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत ‘भुली’ योजना की शुरुआत ग्राम विकास मंत्री भरत सिंह चौधरी ने जुलाई में की थी। इसका मुख्य उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी लखपति दीदियों के कारोबार को आगे बढ़ाना है। मंत्री भरत सिंह चौधरी ने कहा है कि सरकार की कोशिश है कि तकनीकी प्रशिक्षण के अभाव में कोई महिला उद्यमी पीछे न रहे। उनका प्रयास है कि लखपति महिलाएं आगे चलकर करोड़पति बनें।
एमआईएस पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, नैनीताल से सबसे ज्यादा 960 महिलाओं ने पंजीकरण कराया है। इसके अलावा रुद्रप्रयाग से 734, पिथौरागढ़ से 686, उत्तरकाशी से 657, हरिद्वार से 631, अल्मोड़ा से 578 और ऊधमसिंह नगर से 483 महिलाओं ने हिस्सा लिया है। साथ ही चमोली से 479, पौड़ी से 425, चंपावत से 192, देहरादून से 221, टिहरी से 218 और बागेश्वर से 63 महिलाओं ने पंजीकरण कराया है। इनमें 1,301 ऐसे उद्यम हैं जिनका सालाना कारोबार आठ लाख रुपये से अधिक है।
जमीनी जांच के बाद पहले चरण में 150 से अधिक महिला उद्यमियों का चयन किया जाएगा। इनमें से बेहतरीन कारोबार वाले 18 उद्यमों को 15 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद दी जाएगी। अन्य चुनी गई महिला उद्यमियों को औसतन चार लाख रुपये तक का बिना ब्याज का ऋण मिलेगा। 18 महीने तक चलने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कारोबार और मुनाफे में 15 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा गया है।

