सीएम धामी का चला चाबुक…चोरी के माल में हिस्सेदारी का आरोप, आबकारी विभाग के उपनिरीक्षक,सिपाही समेत कर्मचारी निलंबित…हुई गिरफ्तारी..

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देहरादून। जीरो टॉलरेंस के बीच आबकारी महकमे में बड़ा एक्शन, हिमाचल पुलिस की कार्रवाई के बाद विभागीय जांच में भी सामने आई गंभीरता, जीरो टॉलरेंस का नारा बुलंद करने वाली धामी सरकार में अब सरकारी महकमे के भीतर कथित तौर पर गड़बड़ी करने वालों पर भी शिकंजा कसता दिखाई दे रहा है।

आबकारी विभाग में सामने आए एक गंभीर प्रकरण ने महकमे में हलचल मचा दी है। हिमाचल प्रदेश के शिमला में हुई चोरी के मामले से जुड़े कथित प्रकरण में ऊधमसिंहनगर आबकारी विभाग के चार कर्मचारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। मामला चोरी के कथित माल में हिस्सेदारी के आरोपों से जुड़ा बताया जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक, शिमला में चोरी की घटना के बाद कुछ आरोपी कथित तौर पर चोरी का सामान लेकर नेपाल की ओर जा रहे थे। इसी दौरान चेकिंग के दौरान आबकारी टीम के संपर्क में आने के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया। आरोप है कि कार्रवाई के दौरान चोरी के माल में कथित हिस्सेदारी को लेकर मामला सामने आया।

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प्रकरण में आबकारी उप निरीक्षक देवेंद्र कुमार, आबकारी सिपाही बलजीत सिंह, उपनल कर्मचारी पप्पू लाल और पीआरडी जवान नईम के नाम सामने आए हैं। मामले में पुलिस कार्रवाई के बाद चारों को हिरासत में लिया गया और उनके खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।

मामला सामने आने के बाद आबकारी विभाग भी चुप नहीं बैठा। विभागीय स्तर पर पूरे घटनाक्रम की गंभीरता को देखते हुए एक गोपनीय टीम का गठन किया गया। टीम ने प्रकरण से जुड़े तथ्यों की जांच करने के बाद अपनी रिपोर्ट आबकारी आयुक्त को सौंप दी।

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रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार पर विभाग ने चारों कर्मचारियों के खिलाफ कड़ा प्रशासनिक कदम उठाया। आबकारी आयुक्त ने मामले की गंभीरता को देखते हुए चारों कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यानी जिस विभाग की जिम्मेदारी अवैध शराब, तस्करी और राजस्व से जुड़े मामलों पर निगरानी रखने की है, उसी विभाग के कर्मचारियों पर चोरी के कथित माल में हिस्सेदारी जैसे गंभीर आरोप लगना अपने आप में बड़ा सवाल खड़ा करता है।

सवाल सिर्फ चार कर्मचारियों की भूमिका का नहीं, बल्कि यह भी है कि आखिर चेकिंग और कार्रवाई की प्रक्रिया के दौरान ऐसी स्थिति पैदा कैसे हुई? सरकार लगातार सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति की बात करती रही है। ऐसे में आबकारी विभाग के भीतर सामने आया यह मामला अधिकारियों के लिए भी एक तरह की परीक्षा बन गया है।

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खास बात यह है कि मामला सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर कार्रवाई में देरी नहीं की गई और चारों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। लेकिन इतना जरूर है कि इस घटनाक्रम ने आबकारी महकमे की कार्यप्रणाली और मैदानी स्तर पर तैनात कर्मचारियों की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब देखने वाली बात होगी कि पुलिस जांच में चोरी के कथित माल की पूरी कहानी क्या सामने आती है और विभागीय जांच आगे बढ़ने पर किन-किन तथ्यों का खुलासा होता है। फिलहाल चार कर्मचारियों के निलंबन से साफ है कि सरकार और आबकारी विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है और कथित गड़बड़ी पर कार्रवाई का संदेश देने की कोशिश की है।