देहरादून। उत्तराखंड के नैनीताल जिले में दूषित पेयजल आपूर्ति और काम में लापरवाही बरतने पर राज्य सरकार ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर उत्तराखंड जल संस्थान और पेयजल निगम के छह वरिष्ठ और कनिष्ठ इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। जन स्वास्थ्य से जुड़े किसी मामले में राज्य में पहली बार इतनी बड़ी कार्रवाई की गई है।
नैनीताल के ज्योलीकोट क्षेत्र में दूषित पानी की आपूर्ति की शिकायतें मिलने के बाद मुख्यमंत्री धामी ने उच्च अधिकारियों को मामले की जांच के आदेश दिए थे। जिला प्रशासन की रिपोर्ट में अधिकारियों की लापरवाही उजागर होने के बाद यह सख्त कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री ने साफ किया है कि जनता के स्वास्थ्य और हितों से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कार्रवाई के तहत उत्तराखंड जल संस्थान हल्द्वानी के प्रभारी अधीक्षण अभियंता, नैनीताल जल संस्थान के सहायक अभियंता और अपर सहायक अभियंता को निलंबित किया गया है। इसके साथ ही पेयजल निगम भीमताल के अधिशासी अभियंता, प्रभारी सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता पर भी निलंबन की गाज गिरी है। वहीं, नैनीताल जल संस्थान के अधिशासी अभियंता को भविष्य के लिए सख्त चेतावनी जारी की गई है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार के लिए जनहित सर्वोपरि है। जो भी अधिकारी या कर्मचारी अपने दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरतेगा, उसके खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी विभागाध्यक्षों और शीर्ष अधिकारियों को जनसुविधाओं से जुड़े मामलों में पूरी पारदर्शिता और मुस्तैदी से काम करने के निर्देश दिए हैं।
प्रदेश में ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत लगातार कड़े फैसले लिए जा रहे हैं। इससे एक दिन पहले ही CM धामी ने NEET UG 2026 की राज्य काउंसिलिंग में फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर दाखिला लेने के मामले में सख्त एक्शन लिया था। मुख्यमंत्री के निर्देश पर इस मामले में शामिल आठ अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र निरस्त करते हुए उनका प्रवेश भी रद्द कर दिया गया है।

