देहरादून। उत्तराखंड में हलाला और तीन तलाक की पीड़िताओं के सामाजिक पुनर्वास के लिए एक बड़ी पहल की जा रही है। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने राज्य की जरूरतमंद और बेघर पीड़िताओं को मुफ्त आवास उपलब्ध कराने की विशेष योजना तैयार की है। बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में इस योजना की जानकारी दी और बताया कि जल्द ही बोर्ड की बैठक में इसका प्रस्ताव रखा जाएगा।
वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स के अनुसार, तीन तलाक और हलाला का दंश झेल रहीं कई महिलाएं वर्तमान में पूरी तरह बेघर हैं। ऐसी पीड़ित महिलाओं को सम्मानजनक जीवन और सामाजिक सुरक्षा देने के लिए बोर्ड अपने स्तर पर आवास निर्माण कराएगा। इस योजना के लागू होने से प्रदेश की कई असहाय महिलाओं को सिर ढकने के लिए पक्की छत मिल सकेगी।
शादाब शम्स ने बताया कि वक्फ बोर्ड का मूल उद्देश्य ही समाज के गरीब, असहाय और जरूरतमंद लोगों की मदद करना है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार द्वारा लाए गए वक्फ अमेंडमेंट एक्ट 2019 के बाद से जरूरतमंदों में उम्मीद जगी है और बोर्ड उसी दिशा में जनकल्याणकारी कदम उठा रहा है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य बेघर हो चुकी पीड़ित महिलाओं को किसी अन्य पर निर्भर रहने के बजाय आत्मनिर्भर बनाना है। हलाला और तीन तलाक से प्रभावित महिलाओं को आवास मिलने से उन्हें समाज में एक मजबूत सहारा प्राप्त होगा।
प्रस्तावित योजना के तहत वक्फ बोर्ड अपनी संपत्तियों का समुचित उपयोग करते हुए इन आवासों का निर्माण कराएगा। आगामी बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पारित होते ही मकानों के निर्माण की प्रक्रिया और पात्र महिलाओं के चयन के मापदंड तय किए जाएंगे।
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड का यह कदम राज्य में पीड़ित मुस्लिम महिलाओं के सामाजिक व आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक अहम फैसला माना जा रहा है। बोर्ड का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पीड़ित महिला बेघर होकर दर-दर भटकने को मजबूर न हो।

