देहरादून: दाखिला पाने के लिए कराई थी नकली ‘धर्मवीर सिंह’ की एंट्री, SIT जांच में घिरे कई बड़े अफसर

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देहरादून। एमबीबीएस सीट हासिल करने के लिए फर्जी स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनाने के एक सुनियोजित फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। गिरोह ने राजधानी में दर्ज दो असली स्वतंत्रता सेनानियों के नाम-पते का दुरुपयोग कर ‘धर्मवीर सिंह’ नाम से तीसरे फर्जी स्वतंत्रता सेनानी की प्रशासनिक रिकॉर्ड में एंट्री करा दी। इस खेल में देहरादून प्रशासन के कर्मचारियों और गिरोह के साथियों की साठगांठ सामने आ रही है।

मामले का खुलासा शिकायतकर्ता प्रदीप बहुगुणा की शिकायत के बाद हुआ, जिस पर जिलाधिकारी आशीष चौहान ने तत्काल विस्तृत जांच बिठाई थी। जांच में सामने आया कि दून में धर्मवीर पुत्र उग्रसेन और धर्मवीर पुत्र मनोहरलाल नाम से दो असली स्वतंत्रता सेनानी पंजीकृत हैं। गिरोह ने साजिश के तहत धर्मवीर के नाम के आगे ‘सिंह’ जोड़कर और पिता का नाम ‘खजान सिंह’ दर्ज कर फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करवा लिया

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शातिर गिरोह ने पहले अभ्यर्थियों के स्थानीय स्तर पर फर्जी स्थायी निवासी प्रमाण पत्र बनाए और फिर उसी आधार पर फर्जी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र जारी करा दिए। इतना ही नहीं, जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह ने छात्रों के नाम से अलग-अलग पते दर्ज करवाकर नए आधार कार्ड भी बनवाए थे

सीडीओ अभिनव शाह और एडीएम स्मृता परमार के नेतृत्व में बनी जांच कमेटी ने दो पटवारियों और एक डाटा एंट्री ऑपरेटर को प्राथमिक रूप से जिम्मेदार माना है। दोनों पटवारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं, मामले की बढ़ती जांच के बीच अब कुछ बड़े प्रशासनिक अधिकारियों पर भी जांच की आंच आ रही है, जिनसे एसआईटी जल्द पूछताछ कर सकती है

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इस फर्जी दस्तावेज के जरिए हरिद्वार मेडिकल कॉलेज में एक छात्रा तृप्ति ने एमबीबीएस में दाखिला भी हासिल कर लिया था। शुरुआत में कॉलेज प्रबंधन की जांच कमेटी ने दस्तावेजों को सही बताकर मेल भेज दिया था। हालांकि, अगले ही दिन देहरादून डीएम स्तर से हुई जांच में दस्तावेज फर्जी पाए जाने पर दाखिला निरस्त कर पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया गया।

इस फर्जीवाड़े में गंभीर लापरवाही तब सामने आई जब 13 सितंबर को रायपुर और क्लेमेनटाउन थाने में मुकदमा दर्ज होने के बावजूद आरोपी छात्रा स्वाति को सेकंड काउंसलिंग में शामिल कर लिया गया। एफआईआर के बाद भी काउंसलिंग में एंट्री मिलने से पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

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उधर, मामला तूल पकड़ते ही ऑनलाइन पोर्टल से संदिग्ध प्रमाण पत्रों को हटाने का खेल भी शुरू हो गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, जिस छात्र के दस्तावेज संदिग्ध थे, उसका प्रमाण पत्र बुधवार को ऑनलाइन पोर्टल से हटा दिया गया। फिलहाल पुलिस और एसआईटी साक्ष्य मिटाने की इस कोशिश और पूरे गिरोह की पड़ताल में जुटी हुई है