देहरादून। उत्तराखंड वानिकी प्रशिक्षण अकादमी में अब वन विभाग के फील्ड स्टाफ को तस्करों, शिकारियों और अतिक्रमणकारियों से निपटने के लिए इजरायली आत्मरक्षा तकनीक ‘क्रॉव मागा’ का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह कदम गश्त के दौरान वन कर्मियों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए उठाया गया है।
राज्य में अब तक ड्यूटी के दौरान 59 वन कर्मियों ने अपनी शहादत दी है। इनमें से 20 कर्मी तस्करों से मुठभेड़ में शहीद हुए, 18 की मौत वनाग्नि में, 18 की जान वन्यजीवों के हमले में गई और 3 कर्मियों की मौत प्राकृतिक आपदाओं के कारण हुई है।
मौजूदा समय में अधिकतर फील्ड स्टाफ के पास आधुनिक हथियार नहीं होते हैं और उन्हें केवल डंडे के सहारे ही बड़े खतरों का सामना करना पड़ता है। इसी सुरक्षा जोखिम को देखते हुए अकादमी ने कर्मियों को इजरायली मार्शल आर्ट ‘क्रॉव मागा’ सिखाने का फैसला किया है।
मुख्य वन संरक्षक व यूएफटीए निदेशक संजीव ने बताया कि क्रॉव मागा का प्रशिक्षण आमतौर पर आईपीएस अधिकारियों, पुलिस और कस्टम को दिया जाता है। अब उसी विशेषज्ञ संस्था के माध्यम से वन कर्मियों को दो चरणों में यह ट्रेनिंग दी जाएगी, जिसमें 8 दिन संस्थान में और 7 दिन जंगल के भीतर अभ्यास शामिल होगा।
अकादमी ने गश्त के दौरान अग्रिम पंक्ति के वन कर्मियों के सामने आने वाले तीन प्रमुख खतरों की पहचान की है। पहला खतरा अवैध पातन, खनन और शिकार में शामिल सशस्त्र तस्करों का है जो गश्ती टीमों पर अचानक जानलेवा हमला कर देते हैं।
दूसरा बड़ा संकट घने जंगलों में गश्त के दौरान बाघ, तेंदुए, भालू या हाथी से अचानक सामना होना है। वहीं तीसरा संकट वनाग्नि और प्राकृतिक आपदाओं का है, जहां भीषण लपटों के बीच घिरे कर्मियों को सुरक्षित निकलने के लिए असाधारण शारीरिक व मानसिक क्षमता की जरूरत होती है।
इस इजरायली ट्रेनिंग के तहत वन कर्मियों को लाठी, धारदार हथियार या बंदूक लिए हमलावरों को बेअसर (निरस्त्र) करना सिखाया जाएगा। इसके साथ ही अगर कर्मी कई हमलावरों से घिर जाएं, तो सुरक्षित घेरा तोड़कर निकलने की तकनीक भी सिखाई जाएगी।
क्रॉव मागा तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे बिना किसी पूर्व अनुभव के भी बेहद कम समय में सीखा जा सकता है। इस प्रशिक्षण से उत्तराखंड के वन कर्मियों का मनोबल बढ़ेगा और वे विषम परिस्थितियों में अपनी व वन संपदा की सुरक्षा कर सकेंगे।

