कांग्रेस की ‘महिला सम्मान’ की दुहाई पर सवाल!चकराता की दो बेटियों को पार्टी में लाने का दबाव, विरोध पर गाली-गलौज का आरोप…. ऑडियो वायरल

ख़बर शेयर करें

देहरादून। “लड़की हूं, लड़ सकती हूं” और “अंकिता हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं” जैसे नारों के साथ महिला सम्मान और सुरक्षा की लड़ाई लड़ने का दावा करने वाली कांग्रेस अब एक कथित ऑडियो को लेकर सवालों के घेरे में है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस ऑडियो में कथित तौर पर एक व्यक्ति को किसी पिता पर कांग्रेस में शामिल होने का दबाव बनाते और विरोध करने पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए सुना जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि मामला देहरादून जनपद के चकराता क्षेत्र का है और फोन पर बात करने वाला व्यक्ति कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह का भाई चमन सिंह है। हालांकि, समाचार 4U इस ऑडियो की प्रामाणिकता और इसमें सुनाई दे रही आवाज की पहचान की पुष्टि नहीं करता है।

बेटियों को कांग्रेस में शामिल कराने का दबाव?

वायरल ऑडियो को लेकर किए जा रहे दावों के मुताबिक, चकराता निवासी बालक राम नाम के व्यक्ति को फोन किया गया। कथित बातचीत में उनकी दोनों बेटियों को कांग्रेस में शामिल कराने की बात कही जा रही है। आरोप है कि जब बात मनमुताबिक नहीं बनी तो फोन पर गाली-गलौज शुरू हो गई।

यह भी पढ़ें -  उत्तराखंड: चतुर्थ श्रेणी के 2364 पदों पर भर्ती लटकी, सफाई-रखरखाव करने को मजबूर शिक्षक और बच्चे

यदि वायरल ऑडियो में लगाए जा रहे आरोप सही साबित होते हैं, तो सवाल सिर्फ राजनीतिक सदस्यता का नहीं, बल्कि किसी परिवार पर दबाव बनाने और बातचीत में मर्यादा की सीमाएं लांघने का भी है। आखिर किसी राजनीतिक दल में शामिल होना या न होना व्यक्ति का अपना निर्णय है। ऐसे में किसी को राजनीतिक सदस्यता के लिए कथित तौर पर धमकाने या अपशब्द कहने का अधिकार किसने दिया?

फिलहाल इस पूरे मामले में वायरल ऑडियो के दावों और उसकी स्वतंत्र पुष्टि के बीच अंतर करना जरूरी है। ऑडियो की सत्यता, बातचीत का पूरा संदर्भ और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है।

नारों में महिला सम्मान, तो व्यवहार पर सवाल क्यों?

कांग्रेस महिला सम्मान, महिला सुरक्षा और महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी देने के मुद्दों पर अक्सर मुखर रहती है। पार्टी के नेता सार्वजनिक मंचों से महिलाओं के अधिकारों की बात करते हैं और महिला अपराधों को लेकर सरकारों को घेरते हैं। लेकिन चकराता से जोड़कर वायरल हो रहे इस कथित ऑडियो ने एक असहज सवाल खड़ा कर दिया है—क्या राजनीतिक विचारधारा से सहमति न रखने वाले परिवार पर दबाव बनाना भी राजनीति का हिस्सा बन गया है?

यह भी पढ़ें -  उत्तराखंड: अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज में फर्जी अनाथ सर्टिफिकेट से लिया प्रवेश, छात्र पर FIR दर्ज

खासकर तब, जब कथित बातचीत में दो बेटियों को पार्टी में शामिल कराने का जिक्र होने का दावा किया जा रहा है। महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी का अर्थ उन्हें अपनी पसंद की पार्टी चुनने का अधिकार देना है, न कि उनके नाम पर परिवार को कथित तौर पर दबाव में लेना। हालांकि, इस मामले में बेटियों की अपनी प्रतिक्रिया या पक्ष सार्वजनिक रूप से सामने आने की पुष्टि नहीं हुई है।

सत्ता से दूर, फिर भी कथित हनक की चर्चा!

चकराता लंबे समय से उत्तराखंड की राजनीति में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह का प्रमुख राजनीतिक क्षेत्र रहा है। ऐसे में उनके परिवार से जुड़े एक व्यक्ति के नाम के साथ इस तरह का कथित ऑडियो वायरल होना राजनीतिक चर्चा का विषय बनना स्वाभाविक है।

यह भी पढ़ें -  उत्तराखंड: अतिरिक्त डेडलाइन भी खत्म की कगार पर, न भरे जा सके सड़कों के जख्म..! 1,261 KM लंबी सड़कें अब भी बदहाल

विपक्ष में रहते हुए किसी राजनीतिक दल के नेताओं का आचरण भी जनता की नजरों में रहता है। जनता के बीच अपनी स्वीकार्यता और संगठन की मजबूती का दावा करने वाले नेताओं से यह अपेक्षा की जाती है कि वे संवाद में मर्यादा बनाए रखें। यदि कोई व्यक्ति राजनीतिक दबाव बनाने या अभद्र भाषा के इस्तेमाल का दोषी पाया जाता है, तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए—चाहे वह किसी भी दल से जुड़ा हो।

इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कांग्रेस संगठन वायरल ऑडियो की सत्यता की जांच कराने और आरोपों पर अपना पक्ष रखने के लिए आगे आएगा? क्या बालक राम और उनकी बेटियों का पक्ष सामने आएगा? और क्या कथित बातचीत में सुनाई दे रही आवाज की पहचान स्वतंत्र रूप से सत्यापित हो सकेगी? क्योंकि महिला सम्मान केवल मंचों से लगाए जाने वाले नारों का विषय नहीं, बल्कि व्यवहार में दिखाई देने वाली मर्यादा और स्वतंत्रता का सवाल है।