दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने और हवा के ‘खराब’ श्रेणी में पहुंचने के बाद ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रेप-1) के कड़े प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं। इस सख्त प्रशासनिक कदम का सीधा असर उत्तराखंड समेत तमाम पड़ोसी राज्यों से दिल्ली आने वाली पुरानी बसों के संचालन और आम यात्रियों पर पड़ा है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के निर्देशानुसार अब राजधानी में केवल इलेक्ट्रिक, सीएनजी और BS-6 मानकों वाली डीजल बसों को ही प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, दशहरा के अगले दिन बुधवार दोपहर दो बजे दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़कर 244 अंक पर पहुँच गया, जो खराब श्रेणी में आता है। मौसम विभाग ने अंदेशा जताया है कि आने वाले कुछ दिनों तक हवा की स्थिति में विशेष सुधार के आसार नहीं हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए ग्रेप-1 की पाबंदियों को जमीन पर उतार दिया गया है।
बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के वास्ते मेट्रो के फेरे बढ़ा दिए गए हैं ताकि लोग निजी वाहनों का प्रयोग कम करें। इसके साथ ही ट्रैफिक पुलिस को यह निर्देश दिए गए हैं कि वे रेड लाइट पर खड़े वाहनों के इंजन को बंद करवाने के लिए चालकों को प्रेरित करें।
नए प्रदूषण नियंत्रण नियमों के तहत राजधानी के होटल, रेस्तरां और ढाबों के तंदूरों में कोयला तथा लकड़ी जलाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इसके अलावा, किसी आपातकालीन या विशेष स्थिति को छोड़कर डीजल जनरेटरों के इस्तेमाल पर भी कड़ी पाबंदी रहेगी ताकि जहरीले धुएं के उत्सर्जन को रोका जा सके।
उत्तराखंड और अन्य बाहरी राज्यों से दिल्ली की तरफ आने वाली पुरानी डीजल बसों के प्रवेश पर लगे इस प्रतिबंध के कारण यात्रियों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। परिवहन निगम और बस चालकों को अब केवल तय मानकों का पालन करने वाली इलेक्ट्रिक, सीएनजी या बीएस-6 श्रेणी की बसों का ही दिल्ली रूट पर संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

