उत्तराखंड: महज कुछ हजारों के कल-पुर्जों के अभाव में धूल फांक रही हैं लाखों की बसें

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देहरादून। उत्तराखंड परिवहन निगम के पर्वतीय डिपो की बदहाल व्यवस्था के कारण यात्रियों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं। देहरादून स्थित ट्रांसपोर्ट नगर वर्कशॉप में महज 11 हजार रुपये के टायर और स्पेयर पार्ट्स के अभाव में लाखों रुपये की 15 बसें धूल फांक रही हैं। वहीं दूसरी ओर, पर्वतीय रूटों पर बस न मिलने से यात्री घंटों सड़कों पर इंतजार करने को मजबूर हैं।

वर्कशॉप में खड़ी इन गाड़ियों में डिपो की वे नई बसें भी शामिल हैं, जिन्हें महज एक साल पहले बेड़े में शामिल किया गया था। इनमें से एक नई बस पिछले दो महीनों से ‘फ्रंट एक्सल’ न मिलने के कारण खड़ी है। नियमानुसार वारंटी पीरियड में होने की वजह से संबंधित कंपनी को ही इसका एक्सल बदलना था, लेकिन तमाम दावों के बावजूद इसे अभी तक ठीक नहीं किया जा सका है।

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डिपो की छह बसें ऐसी हैं जिनके टायर पूरी तरह घिस चुके हैं, लेकिन नए टायरों की सप्लाई न होने से इन्हें रूटों पर नहीं उतारा जा रहा है। इसके अलावा कई अन्य बसें इंजन, इंजेक्टर और साइलेंसर की तकनीकी कमियों के कारण वर्कशॉप में अटकी हुई हैं।

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मामले में रोडवेज के महाप्रबंधक भूपेश आनंद कुशवाहा ने माना कि वित्तीय संकट के चलते स्पेयर पार्ट्स की खरीदारी में देरी हो रही है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे बजट मिल रहा है, पार्ट्स खरीदे जा रहे हैं। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि जिन नई बसों के पार्ट्स समय पर नहीं बदले गए हैं, उनसे संबंधित कंपनियों पर पेनाल्टी लगाई जाएगी।

देहरादून का यह हिल डिपो मसूरी के अलावा पौड़ी, चमोली, टिहरी, उत्तरकाशी और कुमाऊं मंडल के लिए बस सेवाओं का संचालन करता है। बसों की भारी कमी के चलते बड़कोट समेत कई महत्वपूर्ण रूटों पर सेवाएं लंबे समय से बाधित हैं।

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आने वाले दिनों में पर्यटन सीजन शुरू होने वाला है, जिससे मसूरी और अन्य पर्वतीय रूटों पर यात्रियों का संकट और गहरा सकता है। एक तरफ जनप्रतिनिधि नए रूटों पर बसें चलाने की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उपलब्ध बसें डिपो में सड़ रही हैं।