उत्तराखंड रोडवेज कर्मचारियों की चेतावनी: मांगें पूरी न हुईं तो 23 अक्टूबर को होगा कार्य बहिष्कार

ख़बर शेयर करें

देहरादून। उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने अपनी विभिन्न मांगें पूरी न होने पर राज्यभर में बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। प्रदेश अध्यक्ष कमल पन्नै और महामंत्री अशोक चौधरी ने रोडवेज के प्रबंध निदेशक को एक आधिकारिक ज्ञापन भेजकर स्पष्ट किया है कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो 23 अक्टूबर को 24 घंटे का कार्य बहिष्कार किया जाएगा।

इस दौरान देहरादून, हल्द्वानी बस स्टेशन और टनकपुर कार्यशाला में तीनों मंडलों की ओर से कार्यालय अवधि में जोरदार धरना-प्रदर्शन भी किया जाएगा। यदि इसके बाद भी सरकार या प्रबंधन द्वारा सुध नहीं ली गई, तो आगामी 30 अक्टूबर को सुबह छह बजे से प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया जाएगा।

यह भी पढ़ें -  हरीश रावत की 'जनसंवाद यात्रा' पर दिल्ली से दून तक चढ़ा सियासी पारा, आलाकमान के तल्ख तेवर दरकिनार कर यात्रा जारी

महामंत्री अशोक चौधरी ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि हाल ही में हुई प्रांतीय कार्य समिति की वर्चुअल बैठक में परिवहन निगम की मौजूदा स्थिति और निगम मुख्यालय के कथित विधि विरुद्ध आचरण पर गहरा रोष जताया गया है। बैठक के दौरान सदस्यों को रजिस्ट्रार ट्रेड यूनियन के आदेश के बारे में भी अवगत कराया गया। उन्होंने बताया कि इससे पहले जब आंदोलन का नोटिस दिया गया था, तब विभाग की ओर से एस्मा का दायरा लाया गया था।

प्रबंधन ने वर्ष 2019 के एक पत्र का हवाला देकर प्रांतीय कार्यकारिणी के महामंत्री समेत 10 सदस्यों को आंदोलन में शामिल होने से रोकने के निर्देश दिए थे। इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी, जिसके बाद मामला रजिस्ट्रार ट्रेड यूनियन के पास पहुंचा और वहां प्रबंध निदेशक के उस आदेश को खारिज कर दिया गया।

यह भी पढ़ें -  खटीमा: 'आंगन मिलन' कार्यक्रम में पहुंचे सीएम धामी, बच्चों को अपने हाथों से खाना परोसकर जीता दिल

कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में चालकों, परिचालकों, तय विशेष श्रेणी और कार्यशाला कर्मियों को नियमित होने तक ‘समान काम-समान वेतन’ के तहत 30,447 रुपये मासिक वेतन दिया जाना शामिल है। इसके अलावा, सभी परिवहन निगम कर्मियों का वेतन हर महीने की 7 तारीख तक अनिवार्य रूप से जारी करने की मांग की गई है।

आगामी कुंभ मेला, हरिद्वार से पहले निगम के बेड़े में कम से कम 500 नई बसें शामिल करने और हिमाचल पथ परिवहन निगम की तर्ज पर कर्मचारियों को राजकीय कोष से वेतन देने की व्यवस्था करने की पुरजोर मांग उठाई गई है। साथ ही, सभी एजेंसी चालकों, परिचालकों और अन्य कार्मिकों को निगम कर्मचारी घोषित कर एजेंसी प्रथा को पूरी तरह बंद किए जाने की मांग की गई है।

यह भी पढ़ें -  उत्तराखंड के निजी आयुष कॉलेजों में फर्जी दाखिलों का भंडाफोड़, कुलसचिव की गोपनीय चिट्ठी वायरल होने से हड़कंप

इस अल्टीमेटम के सामने आने के बाद परिवहन विभाग और शासन स्तर पर हलचल तेज हो गई है। कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्षों से अपनी सेवाएं पूरी निष्ठा से दे रहे हैं, लेकिन उनके अधिकारों की अनदेखी के कारण उन्हें यह कड़ा कदम उठाने के लिए विवश होना पड़ रहा है। आने वाले दिनों में यदि प्रशासन और यूनियन के बीच कोई सकारात्मक समझौता नहीं होता है, तो यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।