उत्तराखंड: पहली बार गठित हुआ ‘चिकित्सा आपूर्ति निगम’,अब अस्पतालों में दवाओं की खरीद होगी पारदर्शी

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देहरादून। उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों में दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों की पारदर्शी व सुगम खरीद सुनिश्चित करने के लिए राज्य में पहली बार ‘उत्तराखंड चिकित्सा आपूर्ति निगम’ का आधिकारिक तौर पर गठन कर दिया गया है। राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद शासन ने निगम के गठन को लेकर विधिवत शासनादेश जारी कर दिया है। इस नई व्यवस्था के लागू होने से अब प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में इसी निगम के माध्यम से आवश्यक दवाइयों और मेडिकल उपकरणों की आपूर्ति की जाएगी।

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इस निगम के निदेशक मंडल में अध्यक्ष पद की कमान मुख्य सचिव संभालेंगे। इसके अलावा वित्त सचिव, नियोजन सचिव, महानिदेशक, निदेशक, प्रबंध निदेशक और शासन द्वारा नामित दो स्वतंत्र निदेशक इसके सदस्य होंगे। इस पूरे निगम के लिए कुल 15 पदों का एक सुदृढ़ ढांचा स्वीकृत किया गया है, जिसमें प्रबंध निदेशक पद पर एक आईएएस अधिकारी की तैनाती की जाएगी।

राजस्थान और तमिलनाडु राज्यों की सफल तर्ज पर गठित इस निगम को कंपनी अधिनियम 2013 के तहत स्थापित किया गया है। इस ऐतिहासिक फैसले पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि इससे पर्वतीय क्षेत्रों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर बड़े अस्पतालों तक गुणवत्तापूर्ण दवाइयां, सर्जिकल सामग्री और आधुनिक उपकरण बिना किसी रुकावट के मिल सकेंगे, जो स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नए युग का सूत्रपात है।

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इस व्यवस्था के आने से अस्पतालों को अलग से दवा व उपकरणों की खरीद के लिए लंबी टेंडर प्रक्रिया के झंझट से नहीं गुजरना पड़ेगा। निगम सीधे निर्माता कंपनियों से थोक भाव में खरीद करेगा, जिससे लागत घटेगी और राजकोष पर वित्तीय बोझ कम होगा। देहरादून में स्थापित होने वाले इस निगम के मुख्य कार्यालय में पहले से चल रहे केंद्रीय औषधि भंडार को मर्ज कर दिया जाएगा। इसके साथ ही, एकीकृत डिजिटल इन्वेंट्री सिस्टम लागू होने से एक्सपायरी के करीब पहुंच चुकी दवाओं को समय रहते दूसरे जरूरतमंद अस्पतालों में ट्रांसफर किया जा सकेगा, जिससे भारी आर्थिक नुकसान रुकेगा।