उत्तराखंड में दूर होगा बिजली संकट: नए साल से धरातल पर उतरेंगी 6 नई परियोजनाएं, 1471 मेगावाट बढ़ेगी क्षमता

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देहरादून। लगातार बिजली संकट और बढ़ती मांग से जूझ रहे उत्तराखंड के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है, जहां यूजेवीएनएल की 1471 मेगावाट क्षमता की छह नई बिजली परियोजनाएं नए साल से धरातल पर उतरनी शुरू हो जाएंगी। यूजेवीएनएल के प्रबंध निदेशक एके सिंह ने जानकारी दी है कि बीईएसएस समेत पांच अन्य परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है और आने वाले समय में इनका काम धरातल पर नजर आएगा। उनका मुख्य उद्देश्य आगामी पांच से सात वर्षों के भीतर राज्य में बिजली की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है, जिससे राज्यवासियों को बिजली कटौती से बड़ी राहत मिल सकेगी।

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इस पूरी योजना के तहत पहली बार चीला पावर हाउस पर 90 मेगावाट का बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम भी शामिल किया गया है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य की पीक बिजली मांग 2883 मेगावाट रहने का अनुमान है, जो साल 2030-31 तक बढ़कर 3332 मेगावाट और साल 2035-36 तक 4100 मेगावाट के स्तर को पार कर सकती है। राज्य की वार्षिक ऊर्जा आवश्यकता भी वर्ष 2026-27 के 1,755.7 करोड़ यूनिट से बढ़कर वर्ष 2035-36 तक 2,635.2 करोड़ यूनिट होने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।

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बढ़ती मांग के बीच जहां 1320 मेगावाट का कोयला आधारित ऊर्जा संयंत्र भी काफी मददगार साबित होने वाला है, जिससे वर्ष 2030-31 तक बिजली मिलने की उम्मीद है और इसके लिए नियामक आयोग से मंजूरी मिलने के बाद अडानी पावर को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

वहीं, राज्य में निर्माणाधीन किशाऊ परियोजना से 211 मेगावाट बिजली मिलेगी, जबकि लखवाड़-व्यासी से 420 मेगावाट बिजली उत्तराखंड को प्राप्त होगी, जिसमें से व्यासी की 120 मेगावाट बिजली मिलने का सिलसिला शुरू भी हो चुका है। इन सबके बीच यूजेवीएनएल ने छह ऐसी नई परियोजनाओं को अंतिम चरण में पहुंचा दिया है, जिससे राज्य को 1471 मेगावाट का अतिरिक्त लाभ होगा।

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इन छह नई परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति पर नजर डालें तो ट्यूनी-प्लासू का टेंडर जारी हो चुका है, आकोट-ट्यूनी की डीपीआर अप्रूव हो चुकी है, और इच्छाड़ी पंप स्टोरेज प्लांट की डीपीआर तैयार हो चुकी है। इसके अलावा सौंग पंप स्टोरेज प्लांट पर काम जारी है, सेला उर्धिग हाइड्रो प्रोजेक्ट की डीपीआर बन रही है, और चीला बीईएसएस का टेंडर जारी कर दिया गया है। इन सभी परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से आने वाले समय में बिजली की मांग के सापेक्ष राज्य में पूरी या उससे भी अधिक विद्युत उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।