देहरादून। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में जारी भारी पलायन का असर अब सीधे तौर पर त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था पर देखने को मिल रहा है, जहां लगातार खाली हो रहे गांवों के कारण स्थानीय निकायों के लिए जनप्रतिनिधि मिलना मुश्किल हो गया है। विनोद गुसान की रिपोर्ट के अनुसार, देहरादून से लेकर पहाड़ी जिलों तक त्रिस्तरीय पंचायतों के दूसरे उपचुनाव के बावजूद कई जिलों में ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य यानी बीडीसी और पंचायत सदस्यों के दावेदार सामने नहीं आ रहे हैं।
राज्य में जून 2025 में हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों और उसके बाद फरवरी 2026 में कराए गए पहले उपचुनाव के बाद अब दूसरे उपचुनाव में भी हजारों पद खाली पड़े हुए हैं। इस मौजूदा उपचुनाव में कुल 23 ग्राम प्रधान, 9 क्षेत्र पंचायत और 3,890 ग्राम पंचायत सदस्यों के पद रिक्त चल रहे हैं, जिन पर चुनाव कराने की नौबत आन पड़ी है। पलायन की मार से सबसे अधिक प्रभावित दिखने वाले पौड़ी गढ़वाल जिले में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर है, जहां सर्वाधिक 1,103 ग्राम पंचायत सदस्य और 8 ग्राम प्रधान के पद खाली हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले उपचुनाव में भी 11 ग्राम प्रधानों के पदों पर एक भी प्रत्याशी मिलने की स्थिति नहीं बन पाई थी। आगामी 12 अक्टूबर को होने वाले मतदान और 14 अक्टूबर को होने वाली मतगणना से ठीक पहले जमीनी हकीकत यह है कि कई छोटी ग्राम सभाओं में चुनाव लड़ने के लिए एक भी प्रत्याशी मिलना मुश्किल हो गया है। स्थिति यह है कि ग्राम पंचायत सदस्यों की संख्या सैकड़ों में थी, जिन पर किसी भी व्यक्ति ने आवेदन तक नहीं किया, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों की लोकतांत्रिक व्यवस्था के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
उत्तराखंड के पर्वतीय और अन्य जिलों में त्रिस्तरीय पंचायत उपचुनाव के तहत रिक्त पदों का जिलावार ब्योरा सामने आया है, जिसके अनुसार अल्मोड़ा में 858 ग्राम पंचायत सदस्य और 1 क्षेत्र पंचायत सदस्य, टिहरी गढ़वाल में 529 पंचायत सदस्य, 4 ग्राम प्रधान और 1 बीडीसी, तथा चमोली में 279 पंचायत सदस्य, 6 ग्राम प्रधान और 1 बीडीसी के पद खाली हैं।
इसके अलावा पिथौरागढ़ में 284 पंचायत सदस्य और 2 ग्राम प्रधान, नैनीताल में 207 पंचायत सदस्य, 1 ग्राम प्रधान और 2 क्षेत्र पंचायत सदस्य, उत्तरकाशी में 199 पंचायत सदस्य, 1 ग्राम प्रधान और 2 क्षेत्र पंचायत सदस्य, ऊधमसिंह नगर में 108 पंचायत सदस्य और 1 ग्राम प्रधान, तथा रुद्रप्रयाग में 107 पंचायत सदस्य और 1 ग्राम प्रधान के पद रिक्त हैं।
साथ ही, चंपावत में 90 पंचायत सदस्य, देहरादून में 65 पंचायत सदस्य और 1 क्षेत्र पंचायत सदस्य, बागेश्वर में 61 पंचायत सदस्य और 1 क्षेत्र पंचायत सदस्य, और हरिद्वार में 14 पंचायत सदस्य व 3 ग्राम प्रधानों के पद खाली पड़े हुए हैं।

