देहरादून। उत्तराखंड में वैश्विक संकट और अमेरिकी टैरिफ के दबाव के चलते दवा, इलेक्ट्रॉनिक्स और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर के निर्यात को 500 करोड़ रुपये का भारी झटका लगा है। इस अप्रत्याशित मंदी के कारण राज्य के उद्योगपतियों और कारोबारियों को गंभीर वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
यह संकट मुख्य रूप से खाड़ी देशों में उत्पन्न तनाव और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक अनिश्चितताओं के कारण खड़ा हुआ है, जिसने राज्य के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार को धीमा कर दिया है। इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड की रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट से आवागमन बाधित होने से उद्योगों को कच्चे माल की भारी किल्लत हो गई है। इसके अलावा बिक्री में गिरावट आने के साथ-साथ ट्रांसपोर्टेशन और बीमा लागत भी काफी महंगी हो गई है।
बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा के चलते कारोबारी अपने उत्पादों के दाम बढ़ाने में असमर्थ हैं, जिसके कारण उनका प्रॉफिट मार्जिन घटकर न्यूनतम स्तर पर आ गया है। समय पर ऑर्डर डिलीवर न होने और भुगतान मिलने में देरी के कारण कंपनियां इन दिनों गंभीर कैश फ्लो संकट से भी जूझ रही हैं।
निर्यात से जुड़े खर्चों में कच्चे माल की लागत 40 प्रतिशत तक, एनर्जी कॉस्ट 15 प्रतिशत तक, ट्रांसपोर्ट 10 प्रतिशत तक और इंश्योरेंस 5 प्रतिशत तक महंगा हो गया है, जबकि इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के अध्यक्ष पंकज गुप्ता के अनुसार खाड़ी संकट और अमेरिकी टैरिफ की अनिश्चितताओं ने राज्य के निर्यात कारोबार को गहरी क्षति पहुंचाई है और उद्योगों को इस संकट से उबारने के लिए सरकार की तरफ से एक समग्र राहत पैकेज की तत्काल आवश्यकता है।
जिसके चलते एसोसिएशन ने सरकार के सामने एमएसएमई सेक्टर को आसान शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराने, उद्योगों को निर्बाध बिजली आपूर्ति और बेहतर लॉजिस्टिक सुविधाएं देने, घरेलू बाजार का दायरा बढ़ाने तथा सरकारी खरीद प्रक्रिया में बड़ी कंपनियों के साथ छोटी इकाइयों को भी शामिल करने जैसी प्रमुख मांगें रखी हैं। जिन पर तुरंत ध्यान दिए जाने की जरूरत है, और नीति आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड का कुल सालाना निर्यात 15 हजार करोड़ रुपये का है जिसमें अकेले 80 प्रतिशत हिस्सेदारी हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर और देहरादून जिलों की है।
राज्य से सबसे बड़े पैमाने पर फार्मास्यूटिकल्स भेजी जाती हैं। इसके अलावा इंजीनियरिंग कलपुर्जे, इलेक्ट्रिकल सामान, फूड प्रोसेसिंग उत्पाद और ज्वेलरी भी दुनिया के तमाम देशों को निर्यात किए जाते हैं। लेकिन मौजूदा भू-राजनीतिक हालात और टैरिफ नीतियों के कारण इस मजबूत आर्थिक चक्र पर बुरा असर पड़ा है।

