राखंड में बिजली संकट से निपटने के लिए बनेंगे 4 मेगा बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम, आयोग ने दी मंजूरी

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देहरादून। उत्तराखंड में बिजली की भारी मांग और कम उपलब्धता के बीच राज्य विद्युत नियामक आयोग ने 76 मेगावाट क्षमता के चार महत्वाकांक्षी बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम प्रोजेक्ट्स के लिए टैरिफ और खरीद समझौते के मसौदे को सशर्त मंजूरी दे दी है। आयोग के अध्यक्ष एमए प्रसाद, सदस्य विधि अनुराग शर्मा और सदस्य तकनीकी प्रभात किशोर डिमरी की पीठ ने देहरादून, ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार और उत्तरकाशी जिलों में इन प्रोजेक्ट्स की स्थापना के लिए यह आदेश जारी किया है।

ये चारों बैटरी प्रोजेक्ट्स ढकरानी, खटीमा, पथरी और तिलोध में स्थापित किए जाएंगे। पारदर्शी ई-निविदा प्रक्रिया के तहत पतंजलि रिन्यूएबल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड ने सबसे कम दरें कोट की थीं, जिसके बाद नियम अनुसार उन्हें तीन प्रोजेक्ट्स और आर्मी इन्फोटेक लिमिटेड को एक प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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उत्तराखंड में स्थापित होने जा रहे इन बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम्स की दरें दिल्ली और पंजाब राज्यों से भी काफी सस्ती मिली हैं। आयोग के अनुसार, उत्तराखंड में ढकरानी में 2,69,832 प्रति मेगावाट/माह, खटीमा में 2,79,501 प्रति मेगावाट/माह, पथरी में 2,79,782 प्रति मेगावाट/माह और तिलोध में 2,80,000 प्रति मेगावाट/माह की दरें तय हुई हैं।

इसकी तुलना में हाल ही में दिल्ली में 12.5 मेगावाट प्रोजेक्ट के लिए 2.99 लाख और पंजाब में 3.35 लाख से 3.44 लाख प्रति मेगावाट/माह की दरें मंजूर हुई थीं। इस प्रकार उत्तराखंड को अन्य राज्यों की तुलना में काफी किफायती दरों पर यह आधुनिक तकनीक मिल रही है, जिससे राज्य के खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।

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केंद्र सरकार की वायबिलिटी गैप फंडिंग योजना के तहत पावर सिस्टम डेवलपमेंट फंड से राज्य को 500 मेगावाट आवर क्षमता आवंटित की गई थी। इसमें से 250 मेगावाट आवर का क्रियान्वयन यूजेवीएनएल के माध्यम से हो रहा है, जिसमें केंद्र सरकार प्रति मेगावाट-आवर 18 लाख रुपये की वित्तीय सहायता तीन किस्तों में देगी।

यह विशाल बैटरी बैंक किस प्रकार काम करेगा, इसे लेकर तकनीकी रूप से स्पष्ट किया गया है कि सामान्य घंटों या दिन के समय जब सस्ती सौर व जलविद्युत उपलब्ध होगी, तब इन बैटरियों को मुफ्त चार्ज किया जाएगा। इसके बाद शाम छह से नौ बजे के दौरान जब बिजली की मांग चरम यानी पीक पर होती है, तब इन बैटरियों से ग्रिड में बिजली की आपूर्ति की जाएगी।

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इस व्यवस्था से राज्य को पीक आवर्स में नेशनल एक्सचेंज से महंगी बिजली खरीदने की मजबूरी से पूरी तरह मुक्ति मिलेगी और बार-बार होने वाली ग्रिड ट्रिपिंग की समस्या भी खत्म हो जाएगी। इन चारों प्रोजेक्ट्स के तहत ढकरानी में 30 मेगावाट, खटीमा में 15 मेगावाट, पथरी में 16 मेगावाट और तिलोध में 15 मेगावाट क्षमता का संयंत्र लगेगा।