देहरादून। उत्तराखंड सरकार की नई फिल्म नीति ने राज्य के मनोरंजन जगत और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खोल दिए हैं। कभी अभिनय या तकनीकी क्षेत्रों में करियर बनाने के लिए मुंबई की दौड़ लगाने वाले पहाड़ी युवाओं को अब अपनी ही देवभूमि में काम मिल रहा है।
राज्य में लगातार बढ़ रही हिंदी फिल्मों, वेब सीरीज और क्षेत्रीय फिल्मों की शूटिंग से स्थानीय कलाकारों का पलायन रुक रहा है। इससे न केवल आजीविका के नए साधन बन रहे हैं, बल्कि देवभूमि को एक नया पहचान मिल रही है।
नई फिल्म नीति के तहत हिंदी और संविधान की आठवीं अनुसूची की फिल्मों को उत्तराखंड में खर्च का 30 प्रतिशत या अधिकतम तीन करोड़ रुपये का अनुदान मिल रहा है। स्थानीय फिल्मों के निर्माण पर 50 प्रतिशत तक की आकर्षक सब्सिडी मिलने से क्षेत्रीय सिनेमा को भारी ऊर्जा मिली है।
फिल्म नीति के इन सकारात्मक नतीजों के कारण बीते वर्ष प्रदेश में 10 से 12 बड़े बैनर की हिंदी फिल्में और वेब सीरीज शूट हुईं। वहीं, स्थानीय स्तर पर 15 फिल्मों का निर्माण हुआ और उनका सफल प्रदर्शन किया गया।
वर्तमान वर्ष के दौरान हरिद्वार, मसूरी और अन्य खूबसूरत वादियों में कई बड़ी फिल्मों की शूटिंग निरंतर जारी है। इस वर्ष लगभग 20 स्थानीय फिल्मों के रिलीज होने की पूरी उम्मीद है, जिनमें से चार फिल्में पहले ही सिनेमाघरों तक पहुंच चुकी हैं।
क्षेत्रीय फिल्म उद्योग में आई इस तेजी का सीधा फायदा नए और उभरते हुए कलाकारों को मिल रहा है। फिल्म अभिनेत्री रूप दुर्गापाल का कहना है कि पहले कलाकारों के लिए मुंबई जाना मजबूरी था, लेकिन अब उत्तराखंड में लगातार शूटिंग होने से स्थानीय प्रतिभाओं को घर के पास ही बेहतर अवसर मिल रहे हैं।
इससे न केवल कलाकारों, बल्कि मेकअप, कैमरा और लाइन प्रोडक्शन जैसे तकनीकी क्षेत्रों से जुड़े लोगों को भी बड़ा रोजगार मिल रहा है। एक फिल्म के जरिए प्रत्यक्ष रूप से 50 से 60 लोगों को काम मिलता है।
स्थानीय फिल्म निर्देशक देबू रावत के अनुसार, 14 मार्च 2024 से फिल्म सब्सिडी का लाभ मिलने के बाद स्थानीय फिल्म उद्योग ने रफ्तार पकड़ी है। वर्ष 2025 में 15 स्थानीय फिल्में बनीं, जिससे फिल्म निर्माण में लगभग पांच गुना वृद्धि दर्ज की गई है।
उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता और बेहतर सड़क-हवाई संपर्क ने फिल्म निर्माताओं के लिए यहां आना बेहद आसान कर दिया है। ‘जोना’ और ‘घपरोल’ जैसी फिल्मों में नए निर्देशकों और स्थानीय तकनीशियनों को प्राथमिकता दी जा रही है।
जल्दी ही राज्य में एक पंजाबी और एक तेलुगु फिल्म की शूटिंग भी शुरू होने वाली है। इससे यह साफ है कि उत्तराखंड का फिल्म उद्योग अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक मजबूत और स्वतंत्र जगह बना चुका है।

