देहरादून। उत्तराखंड में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की सरकारी कोशिशों के बावजूद राज्य में ई-मोबिलिटी इकोसिस्टम की रफ्तार काफी धीमी बनी हुई है। नीति आयोग की ‘इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स’ रिपोर्ट में उत्तराखंड को देश भर में 29वें स्थान पर रखा गया है। राज्य के प्रमुख राजमार्गों और पर्यटन स्थलों पर फास्ट-चार्जिंग नेटवर्क का तेजी से विकास न हो पाने के कारण आम लोग नए ई-वाहन खरीदने से हिचकिचा रहे हैं।
नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि उत्तराखंड में ग्रीन टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों और पर्यटन स्थलों पर ई-चार्जिंग स्टेशनों का विकास बेहद जरूरी है। हालांकि, उत्तराखंड बुनियादी ढांचे के निर्माण में अपेक्षा के अनुरूप तेजी नहीं ला सका है, जिससे राज्य में ई-वाहनों को अपनाने की गति प्रभावित हुई है।
वर्तमान में उत्तराखंड में पर्याप्त चार्जिंग नेटवर्क स्थापित नहीं हो पाया है। आंकड़ों के अनुसार, पूरे राज्य में अभी तक केवल 84 फास्ट-चार्जिंग ई-चार्जिंग स्टेशन और 137 स्टैंडर्ड चार्जिंग स्टेशन ही स्थापित हो पाए हैं। पर्वतीय मार्गों पर चार्जिंग स्टेशनों की यह भारी कमी लंबी दूरी तय करने वाले चालकों के लिए बड़ी चुनौती बन रही है।
उत्तराखंड में इस समय कुल 1.04 लाख ई-वाहन पंजीकृत हैं, जिनमें से 80 फीसदी से अधिक वाहन केवल दोपहिया और तीन-पहिया श्रेणी के हैं। चार्जिंग की सुविधा न मिलने के डर से राज्य में निजी चार-पहिया और व्यावसायिक ई-वाहनों की संख्या अभी भी काफी कम दर्ज की गई है।
नीति आयोग ने राज्यों की रैंकिंग तय करने के लिए ट्रांसपोर्ट इलेक्ट्रिफिकेशन प्रोग्रेस को 50 प्रतिशत, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की तैयारी को 30 प्रतिशत और ई-व्हीकल रिसर्च व इनोवेशन को 20 प्रतिशत का वेटेज दिया था। इन तीनों क्षेत्रों में राज्य के किए गए कार्यों के आधार पर ही उत्तराखंड को यह 29वीं रैंक मिली है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक उत्तराखंड के पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में ई-चार्जिंग स्टेशन स्थापित नहीं किए जाते, तब तक राज्य में ई-वाहनों का रुझान बढ़ाना मुश्किल होगा। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होने के बाद ही राज्य में पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन और ग्रीन ट्रांसपोर्टेशन को गति मिल सकेगी।

