पिथौरागढ़। सोशल मीडिया पर छह साल पुराना भयावह हादसा शेयर कर लोगों में खौफ पैदा करने वालों पर पिथौरागढ़ जिला प्रशासन सख्त हो गया है। मुनस्यारी क्षेत्र में बैली ब्रिज टूटने का साल 2020 का एक पुराना वीडियो हालिया घटना बताकर इंटरनेट पर प्रसारित किया जा रहा था। इस पर तुरंत कड़ा संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी आशीष भटगांई ने जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी को संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट और पेज संचालक के खिलाफ पुलिस में सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।
इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहे इस वीडियो में एक भारी-भरकम पोकलेन मशीन से लदा ट्रक बैली ब्रिज से गुजरता दिखता है, तभी अचानक वजन न सह पाने के कारण पुल टूटकर नीचे खाई में गिर जाता है। तथ्यहीन और भ्रामक दावों के साथ शेयर किए जा रहे इस वीडियो से स्थानीय नागरिकों और उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों के बीच भारी भ्रम और डर का माहौल बनने लगा था, जिसके बाद प्रशासन ने मामले की जांच करवाई।

प्रशासनिक जांच और फैक्ट चेक में यह स्पष्ट हो चुका है कि प्रसारित वीडियो पिथौरागढ़ के मुनस्यारी स्थित धापा बैंड का है, जो जून 2020 में हुए हादसे का है। वर्तमान समय में मुनस्यारी या आसपास के इलाकों में ऐसी कोई अप्रिय घटना नहीं घटी है। वर्षों पुरानी आपदा की वीडियो को वर्तमान का बताकर शेयर करना प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावित करने और जनता में बेवजह अफ़वाह फैलाने का आपराधिक प्रयास है।
जिलाधिकारी आशीष भटगांई ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर सनसनी फैलाने या डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर जनता को गुमराह करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि अफ़वाह फैलाने वाले खातों की पहचान कर उन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी साइबर स्पेस में इस तरह की भ्रामक पोस्ट शेयर न करे।
इसके साथ ही पिथौरागढ़ प्रशासन ने आम नागरिकों और सोशल मीडिया यूज़र्स से जिम्मेदार बनने की पुरजोर अपील की है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि किसी भी फोटो या वीडियो को शेयर करने से पहले उसकी सत्यता और प्रामाणिकता की जांच अवश्य कर लें। बिना पुष्टि के संवेदनशील खबरों या वीडियो को फॉरवर्ड करने वाले लोग भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।

