उत्तराखंड में बिजली का बड़ा संकट: UPCL ने केंद्र से मांगी 1425 MW अतिरिक्त बिजली

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देहरादून। देशव्यापी बिजली संकट की वजह से उत्तराखंड में बिजली की किल्लत तेजी से बढ़ गई है, जिससे प्रदेश की फर्नेस इंडस्ट्री से लेकर ग्रामीण इलाकों तक में भारी कटौती हो रही है। इस स्थिति से निपटने के लिए उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने केंद्र सरकार को पत्र भेजकर अगले साल मार्च तक 1425 मेगावाट अतिरिक्त बिजली देने की मांग की है। यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक पीसी ध्यानी ने यह जानकारी दी।

एमडी पीसी ध्यानी और निदेशक परिचालन एमएल आर्य ने ऊर्जा स्थिति का ब्योरा रखा। उन्होंने बताया कि यूजेवीएनएल का जल विद्युत उत्पादन पिछले साल के 1094 मेगावाट से घटकर इस साल 912 मेगावाट पर आ गया है। वहीं, केंद्रीय पूल से मिलने वाली बिजली भी 837 मेगावाट से गिरकर 715 मेगावाट रह गई है, जिससे आपूर्ति चरमरा गई है।

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प्रदेश में इस समय रोजाना बिजली की मांग लगभग 5.3 करोड़ यूनिट तक पहुंच चुकी है, जिसके सापेक्ष उपलब्धता काफी कम बनी हुई है। निगम प्रबंधन के मुताबिक, एनर्जी एक्सचेंज में 10 रुपये प्रति यूनिट के अधिकतम रेट पर बोली लगाने के बावजूद बाजार में बिजली नहीं मिल पा रही है। इसी उपलब्धता की कमी के चलते राज्यभर में मजबूरीवश बिजली कटौती की जा रही है।

इस बिजली संकट का सबसे भारी असर प्रदेश के फर्नेस उद्योगों पर पड़ा है। बीते दिनों 19 सितंबर को 14 घंटे 15 मिनट, 20 सितंबर को 13 घंटे 45 मिनट, 21 सितंबर को 15 घंटे, 22 सितंबर को 10 घंटे 40 मिनट और 23 सितंबर को 6 घंटे 5 मिनट की कटौती की गई। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में भी रोजाना लगभग ढाई घंटे और छोटे शहरों में घंटों की कटौती हो रही है।

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बिजली किल्लत को दूर करने के लिए यूपीसीएल ने केंद्र सरकार से गैर-आवंटित कोटे से छह महीने के लिए चरणबद्ध आवंटन मांगा है। इसके तहत अक्टूबर में 100, नवंबर में 150, दिसंबर में 300, जनवरी में 400, फरवरी में 300 और मार्च में 175 मेगावाट बिजली की मांग रखी गई है। इस मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी केंद्र सरकार से अलग से अनुरोध करेंगे।

अस्थाई समाधान के तौर पर गैस प्लांट से उत्पादन शुरू किया गया है, लेकिन वहां भी केवल पांच दिन का फ्यूल बैकअप ही बचा हुआ है। इस बीच यूजेवीएनएल से अनुरोध किया गया है कि सौर ऊर्जा के उत्पादन के समय हाइड्रो पावर का बैकअप बचाकर रखा जाए। इस रणनीति से पीक आवर्स के दौरान राज्य को रोजाना लगभग ढाई घंटे अतिरिक्त बिजली मिल सकेगी।

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प्रेस वार्ता में सरकारी दफ्तरों में बिजली बचत और प्रीपेड व्यवस्था पर भी बात की गई। एमडी ने बताया कि बिजली निगम कर्मचारियों के परिसरों में प्रीपेड मीटर लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही मुख्य सचिव से अनुरोध किया गया है कि अनुपूरक बजट में सरकारी विभागों को अलग से बिजली बजट दिया जाए, ताकि वहां भी प्रीपेड मीटर जल्द से जल्द लगाए जा सकें।