बदरीनाथ धाम में डीजे और संगीत पर उठा विवाद: सेना के सांस्कृतिक कार्यक्रम पर फैला रोष, प्रशासन ने झाड़ा पल्ला

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चमोली। प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम के अराइवल प्लाजा परिसर में 19 और 20 सितंबर को सेना द्वारा ‘देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव’ का आयोजन किया गया था। इस दो दिवसीय कार्यक्रम में डीजे और संगीत के उपयोग को लेकर स्थानीय निवासियों, पूर्व जनप्रतिनिधियों और विभिन्न धार्मिक संगठनों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विरोध जता रहे लोगों का आरोप है कि इस आयोजन के दौरान पावन धाम की धार्मिक गरिमा और मर्यादा का ध्यान नहीं रखा गया, जिससे श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं।

कार्यक्रम के स्थान और स्वरूप पर माणा गांव के पूर्व ग्राम प्रधान पीतांबर मोल्फा ने खुलकर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि सेना का यह सांस्कृतिक महोत्सव धाम के बजाय भारत के अंतिम सीमांत माणा गांव में आयोजित किया जाना चाहिए था। बदरीनाथ धाम जैसे परम पवित्र स्थल पर ऐसा मनोरंजन केंद्रित कार्यक्रम आयोजित करना पूरी तरह से अनुचित है और भविष्य में इसका स्थल बदला जाना चाहिए।

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वहीं, बजरंग दल के संयोजक रवि झिंकवाण ने बदरीनाथ धाम के भीतर ऐसे सांस्कृतिक और मनोरंजक कार्यक्रमों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि बदरीनाथ धाम सनातन धर्म का प्रमुख तीर्थस्थल और योग-ध्यान की पावन भूमि है। कपाट बंद होने के बावजूद धाम परिसर में डीजे और लाउडसंगीत के साथ कार्यक्रम आयोजित करना धाम की स्थापित परंपराओं के खिलाफ है।

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मामले में विवाद बढ़ता देख चमोली जिला प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम से पल्ला झाड़ लिया है। प्रशासनिक अधिकारियों ने अपनी सफाई में स्पष्ट किया कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों का पूरा आयोजन सेना की ओर से किया गया था और जिला प्रशासन की भूमिका केवल परिसर में अपने विभागीय स्टॉल तथा प्रदर्शनी लगाने तक ही सीमित थी।

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स्थानीय लोगों और तीर्थ पुरोहितों का मानना है कि सेना के प्रति सभी के मन में अगाध सम्मान है, लेकिन धाम की आध्यात्मिक शांति और ऐतिहासिक परंपराएं सर्वोपरि हैं। स्थानीय प्रतिनिधियों ने शासन और सेना से अपील की है कि सीमांत क्षेत्रों में सेना-जनता के जुड़ाव के लिए माणा जैसे स्थानों का चयन किया जाए, ताकि बदरीनाथ धाम की पवित्रता और मर्यादा अक्षुण्ण बनी रहे।