देहरादून में बोले CM पुष्कर सिंह धामी: ज्ञान के साथ संस्कार जरूरी, युवाओं को दिए सफलता के मंत्र

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देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को संस्कार दिवस पर संबोधित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संस्कार दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपराओं और नैतिक जीवन मूल्यों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दोहराने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल शैक्षणिक और व्यावसायिक सफलता हासिल करना नहीं, बल्कि एक बेहतर इंसान बनना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्ञान व्यक्ति को आगे बढ़ने का मार्ग दिखाता है, जबकि संस्कार उसे सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। जीवन में चरित्र, अनुशासन, ईमानदारी और नैतिक मूल्यों का विशेष महत्व रेखांकित करते हुए उन्होंने विद्यालय द्वारा आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं को प्राथमिकता दिए जाने की सराहना की।

संबोधन के दौरान सीएम धामी ने भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के जीवन को विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत बताया। उन्होंने कहा कि डॉ. कलाम ने अपने जीवन से यह संदेश दिया है कि बड़े सपने देखने के साथ-साथ उन्हें साकार करने के लिए निरंतर कठोर परिश्रम और दृढ संकल्प होना अत्यंत आवश्यक है।

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छात्रों का मार्गदर्शन करते हुए उन्होंने सभी विद्यार्थियों को डॉ. कलाम की प्रसिद्ध आत्मकथा “विंग्स ऑफ फायर” पढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि डॉ. कलाम के जीवन के अनुभव और संघर्ष विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य निर्धारित करने तथा जीवन में आने वाली कठिन से कठिन चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा देंगे।

ग्लोबल परिदृश्य का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज प्रौद्योगिकी, नवाचार और आधुनिक विज्ञान के क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आने वाला समय नई तकनीकों, विशेष कौशल और रचनात्मकता का है, इसलिए युवाओं को आधुनिक ज्ञान में दक्षता हासिल करने के साथ-साथ योग, ध्यान और अनुशासन को भी अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना चाहिए।

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राज्य सरकार की प्राथमिकताओं पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, कौशल विकास और रचनात्मकता को विशेष महत्व दिया गया है। उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था को भविष्य की आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने के लिए सरकार लगातार प्रयासरत है।

सरकार की मंशा स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवाओं को सिर्फ नौकरी खोजने तक सीमित नहीं रखना है, बल्कि उन्हें स्वरोजगार और उद्यमिता के माध्यम से रोजगार सृजक बनने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे युवा आत्मनिर्भर बनकर प्रदेश और देश की आर्थिक प्रगति में अपना योगदान दे सकेंगे। युवाओं के भविष्य और पारदर्शी भर्ती प्रक्रियाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली रोकने के लिए राज्य में सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है।

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इसी पारदर्शी व्यवस्था के बल पर पिछले पांच वर्षों में 35 हजार से अधिक युवाओं को निष्पक्ष रूप से सरकारी नौकरियां प्रदान की गई हैं। अंत में मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के अपने ‘विकल्प रहित संकल्प’ को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शिक्षित, संस्कारित और आत्मनिर्भर युवा अपने ज्ञान और प्रतिभा के बल पर प्रदेश और देश का नाम रोशन करेंगे। कार्यक्रम में स्कूल प्रबंधन, शिक्षक, अभिभावक, छात्र और गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।