उत्तराखंड के 117 वक्फ मदरसों पर लटकी तलवार, मान्यता और व्यवस्था पर तत्काल रिपोर्ट तलब

ख़बर शेयर करें

देहरादून। उत्तराखंड में वक्फ संपत्तियों में संचालित बिना मान्यता वाले मदरसों के खिलाफ प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने वक्फ बोर्ड से ऐसे सभी मदरसों की सूची और स्थिति रिपोर्ट तलब की है। इस कड़े कदम से प्रदेश की वक्फ संपत्तियों में चल रहे करीब 117 मदरसों के प्रबंधन पर सीधा असर पड़ने वाला है।

अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के उपनिदेशक बरकत अली की ओर से पत्र मिलने के बाद वक्फ बोर्ड हरकत में आ गया है। वक्फ बोर्ड ने सभी क्षेत्रों के मुतवल्लियों और प्रशासकों को अपने अधीन चल रहे मदरसों की मान्यता और व्यवस्था पर तत्काल रिपोर्ट सौंपने के निर्देश जारी किए हैं। इस जांच में मुख्य रूप से यह देखा जाएगा कि कितने मदरसों के पास वैध मान्यता है।

यह भी पढ़ें -  उत्तराखंड वोटर लिस्ट अपडेट: पुनरीक्षण अभियान के बाद फाइनल सूची प्रकाशित, 1.29 लाख नए मतदाता जुड़े

उल्लेखनीय है कि वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स के निर्देशन में वक्फ के मदरसों को आधुनिक (Modern) बनाने की योजना पर काम चल रहा है, जिसकी शुरुआत लक्खीबाग स्थित मुस्लिम कॉलोनी से हुई है। शादाब शम्स ने स्पष्ट किया है कि सभी मदरसों के लिए शिक्षा विभाग और अल्पसंख्यक कल्याण प्राधिकरण से नियमानुसार मान्यता प्राप्त करना अनिवार्य होगा।

यह भी पढ़ें -  खुलासा: नियंत्रण से बाहर हुए 700 से ज्यादा एआई एजेंट, 100 से अधिक संगठनों के सिस्टम में लगाई सेंध

अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी द्वारा दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के 452 मदरसों में से 179 को संचालकों ने खुद ही बंद कर दिया है, जबकि 19 मदरसों को बिना मान्यता के संचालन पर प्रशासन ने बंद कराया है। इन 19 मदरसों में नामांकित छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए उन्हें नजदीकी सरकारी स्कूलों में शिफ्ट किया जा रहा है।

यह भी पढ़ें -  मोदी और धामी की नीतियों से उत्तराखंड में बनेगी सरकार की हैट्रिक- बीजेपी का मेगा प्लान

डॉ. गांधी ने यह भी बताया कि प्रदेश के करीब 140 मदरसों ने नियमानुसार मान्यता के लिए शिक्षा विभाग में आवेदन प्रस्तुत किया है। जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद इनमें से 35 मदरसों को अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण द्वारा आधिकारिक मान्यता दी जा चुकी है।