Uttarakhand Politics: हरीश रावत की दो पोस्ट ने बढ़ाई कांग्रेस की बेचैनी, मंगलौर में ‘बदलाव’ के मायने क्या?

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देहरादून। उत्तराखंड की सियासत में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को राजनीति का माहिर खिलाड़ी माना जाता है। लेकिन सोशल मीडिया के दौर में उनकी पोस्ट कई बार खुद उनके लिए भी सियासी सवाल खड़े कर देती हैं। मंगलौर दौरे के दौरान हरीश रावत की सोशल मीडिया पर सामने आईं दो पोस्ट अब कांग्रेस के भीतर और बाहर चर्चा का विषय बनी हुई हैं। सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि रावत ने क्या लिखा, बल्कि बड़ा सवाल यह है कि आखिर मंगलौर में वह किस बदलाव की बात कर रहे थे?

मंगलौर पहुंचने पर हरीश रावत ने कार्यकर्ताओं के स्वागत की तस्वीरों के साथ पोस्ट करते हुए लिखा कि मंगलौर में देवतुल्य कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया भव्य स्वागत दिल को छू गया। उन्होंने कार्यकर्ताओं के अपार स्नेह, प्यार और आशीर्वाद के लिए धन्यवाद देते हुए आगे लिखा कि “आपका यह जोश बता रहा है बदलाव तय है।” यहीं से राजनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।

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क्योंकि मंगलौर विधानसभा सीट कांग्रेस के लिए महज एक सामान्य विधानसभा क्षेत्र नहीं है। ऐसे में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत जब उसी इलाके में जाकर “बदलाव” की बात करते हैं, तो स्वाभाविक तौर पर सवाल उठता है कि आखिर यह बदलाव किस संदर्भ में है? मामला यहीं नहीं रुका।

हरीश रावत की ओर से एक दूसरी पोस्ट भी सामने आई, जिसमें उन्होंने लिखा- “जोश भी है, जुनून भी है, मंगलौर में बदलाव की गूंज भी है।” एक ही दौरे और एक ही राजनीतिक क्षेत्र को लेकर लगातार दो पोस्ट में “बदलाव” शब्द का इस्तेमाल होने से चर्चाओं को और हवा मिल गई।

अब राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगे कि क्या यह महज शब्दों का चयन था या फिर इसके पीछे कोई सियासी संदेश छिपा था? क्या रावत मंगलौर विधानसभा क्षेत्र में किसी राजनीतिक बदलाव की ओर इशारा कर रहे थे? या फिर यह सामान्य राजनीतिक उत्साह में लिखी गई पोस्ट थी, जिसका बाद में अलग अर्थ निकाला जाने लगा? सबसे ज्यादा चर्चा कांग्रेस के भीतर संभावित समीकरणों को लेकर हो रही है।

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मंगलौर से जुड़े कांग्रेस के मौजूदा राजनीतिक नेतृत्व और हरीश रावत के बीच क्या सब कुछ सहज है? क्या रावत की पोस्ट का संबंध स्थानीय संगठन या नेतृत्व से है? या फिर सोशल मीडिया पोस्ट को जरूरत से ज्यादा राजनीतिक चश्मे से देखा जा रहा है? फिलहाल इन सवालों का कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है।

दिलचस्प बात यह भी रही कि पोस्ट सामने आने के कुछ घंटे बाद उसके शब्दों में आंशिक बदलाव किया गया। शब्दों में हुए इस संशोधन ने चर्चा को और बढ़ा दिया। क्योंकि अगर पहली पोस्ट में “बदलाव होगा” जैसी बात लिखी गई और बाद में भाषा को बदला गया, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर ऐसा क्या था जिसे बाद में संशोधित करने की जरूरत पड़ी? कांग्रेस के लिए परेशानी यह है कि पार्टी लगातार एकजुटता का संदेश देने की कोशिश करती रही है।

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ऐसे में वरिष्ठ नेता की सोशल मीडिया पोस्ट अगर किसी विधानसभा क्षेत्र में “बदलाव” की बात करती नजर आए, तो विपक्ष को सवाल उठाने का मौका मिलना तय है। सवाल ये भी है कि क्या मंगलौर में बदलाव केवल राजनीतिक माहौल का संकेत है, या फिर कांग्रेस के भीतर किसी बदलाव की आहट है?

क्या यह स्थानीय नेतृत्व को लेकर कोई संदेश है, या फिर महज सोशल मीडिया पर उत्साह में लिखे गए शब्द? इन सवालों का जवाब हरीश रावत ही बेहतर तरीके से दे सकते हैं। फिलहाल उनकी दो पोस्ट ने मंगलौर की सियासत में चर्चा जरूर छेड़ दी है। पोस्ट के शब्द बदले जा सकते हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर उठे सवाल इतनी आसानी से नहीं बदलते।