रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के अगस्त्यमुनि ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले सिला ब्राह्मण गांव में प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था इन दिनों बेहद बदहाल दौर से गुजर रही है। खास बात यह है कि यह क्षेत्र राज्य के प्राथमिक शिक्षा निदेशक केएस रावत का अपना पैतृक गांव है, इसके बावजूद यहां के प्राथमिक विद्यालय में लंबे समय से शिक्षकों का भारी संकट बना हुआ है। वर्तमान समय में इस विद्यालय में कुल 33 बच्चे अध्ययनरत हैं, लेकिन इन सभी नौनिहालों को पढ़ाने की पूरी जिम्मेदारी महज एक ही शिक्षिका के कंधों पर टिकी हुई है।
अकेली तैनात होने के कारण इस शिक्षिका को बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ स्कूल का मिड-डे मील और प्रधानाध्यापिका से जुड़े तमाम प्रशासनिक कार्य भी अकेले ही संभालने पड़ रहे हैं। स्थिति इतनी विकट है कि जब कभी किसी जरूरी काम के चलते शिक्षिका को विद्यालय से बाहर जाना पड़ता है, तब मजबूरी में जूनियर हाईस्कूल के शिक्षकों को आगे आकर बच्चों को संभालना और पढ़ाना पड़ता है।
स्थानीय ग्रामीण उमेश पंवार ने जानकारी देते हुए बताया कि जनप्रतिनिधियों से लेकर शिक्षा निदेशक और खंड शिक्षा अधिकारी स्तर तक कई बार विद्यालय में नए शिक्षकों की तैनाती की पुरजोर मांग की जा चुकी है। इसके बावजूद जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों और विभाग की ओर से अभी तक इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए कोई भी ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
सरकारी नियमों के मुताबिक तीस से अधिक छात्र संख्या वाले किसी भी प्राथमिक विद्यालय में कम से कम तीन शिक्षकों का होना अनिवार्य माना जाता है। इसके बावजूद सिला ब्राह्मण के इस प्राथमिक विद्यालय में निर्धारित मानकों की खुलेआम अनदेखी करते हुए केवल एक ही शिक्षिका को तैनात रखा गया है, जिससे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शिक्षकों की इस भारी कमी और लचर व्यवस्था के कारण गांव के कई अभिभावक अब अपने बच्चों को सरकारी स्कूल से निकालकर निजी विद्यालयों में पढ़ाने के लिए विवश हो चुके हैं। इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए जिला शिक्षा अधिकारी प्राथमिक रुद्रप्रयाग अजय चौधरी ने कहा है कि विद्यालय में शिक्षकों के तय मानकों को जल्द से जल्द पूरा किया जाएगा और सिला ब्राह्मण गांव के प्राथमिक विद्यालय में अतिशीघ्र नए शिक्षकों की तैनाती सुनिश्चित की जाएगी।

