स्वच्छ गंगा और शहरी स्वच्छता के मोर्चे पर उत्तराखंड ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स और सामाजिक संस्था दायरा की नई रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में वाटर ट्रीटमेंट की क्षमता नौ साल में ढाई गुना बढ़ गई है.
‘उत्तराखंड शहरी स्वच्छता सम्मेलन 2026’ में जारी हुई रिपोर्ट के मुताबिक साल 2015 में राज्य में सिर्फ 24 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट थे उनकी सीवर साफ करने की क्षमता कुल 152.9 MLD थी।
जो साल 2024 तक बढ़कर 428 MLD हो गई थी। दरअसल इस अवधि में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की तादाद 24 से बढ़कर 69 हो गई। यानी सीवेज प्लांट में तकरीबन तीन गुना इजाफा हुआ है। जिसका सीधा असर नदियों पर पड़ रहा है। अब राज्य में नदियों का पानी साल 2015 के मुकाबले ज्यादा साफ है। मौजूदा वक्त में हर रोज 428 MLD सीवेज का ट्रीटमेंट किया जा रहा है। जिससे नमामि गंगे मिशन को भी मजबूती मिली है।
रिपोर्ट में देहरादून, मसूरी, रुद्रपुर और लालकुआं को ‘लाइटहाउस सिटी’ का दर्जा दिया गया है. इन शहरों ने कचरा प्रबंधन और सीवेज ट्रीटमेंट में कुछ नए प्रयोग किए गए हैं। जिनको हल्द्वानी, हरिद्वार, और ऋषिकेश जैसे शहर फॉलो कर रहे हैं।
बहरहाल राज्य सरकार तेजी से नए STP लगाने पर काम कर रही है ताकि सूबे की नदियां प्रदूषण मुक्त रहें। बताया जा रहा है कि जिन सीवर ट्रीटमेंट प्लांट पर काम चल रहा है उनके पूरे होने के बाद राज्य में सीवेज ट्रीटमेंट 700 MLD हो जाएगा। माना जा रहा है कि जिस रफ्तार से सूबे की सरकार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पर काम कर रही है उससे उम्मीद जगी है कि साल 2030 तक शहरी निकायों में 100 फीसद सीवेज ट्रीटमेंट हो जाएगा।
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