नीट-यूजी पेपर लीक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है और साफ तौर पर कहा है कि जब तक इस तरह के मामलों में व्यक्तिगत और संस्थागत जवाबदेही स्पष्ट रूप से तय नहीं की जाएगी, तब तक पेपर लीक की असल समस्या को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता। शीर्ष अदालत के जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने पेपर लीक होने की घटनाओं को न केवल छात्रों बल्कि उनके पूरे परिवार और परिजनों के लिए बेहद दुखद और निराशाजनक बताया है।
अदालत ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को कड़ी नसीहत देते हुए कहा कि उसे वर्षों से बिना किसी विवाद के देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षाएं आयोजित कराने वाले UPSC से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है, ताकि परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनी रहे और हमारे युवाओं को किसी भी प्रकार की निराशा का सामना न करना पड़े।
NTA में विशेषज्ञता और संस्थागत सुधार बेहद जरूरी
अदालत ने केंद्र सरकार को कड़े निर्देश जारी करते हुए कहा है कि वह छह सप्ताह के भीतर एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करे, जिसमें यह पूरी तरह स्पष्ट होना चाहिए कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को कैसे अधिक सशक्त, सुरक्षित और पूरी तरह लीक-प्रूफ बनाया जाएगा। पीठ ने चिंता जताते हुए कहा कि एनटीए के पास वर्तमान में एड-हॉक स्वरूप की व्यवस्था है, जबकि पेपर लीक देश का एक बेहद संवेदनशील और प्रमुख मुद्दा बन चुका है; ऐसे में बिखरी हुई जिम्मेदारियों के कारण अंतिम जवाबदेही हमेशा सरकार पर आ जाती है।
इसलिए सिस्टम के भीतर किसी एक व्यक्ति की काबिलियत पर निर्भर रहने के बजाय एक ऐसा मजबूत और विकसित संगठन होना चाहिए, जहां सामान्य ‘जिम्मेदारी क्लॉज’ के बजाय ठोस संस्थागत सुधार किए जाएं और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े उन खास अधिकारियों की पहचान की जाए जिनकी लापरवाही से ऐसी बड़ी गड़बड़ियां सामने आती हैं।
AI तकनीक और सुरक्षा जांच होगी और सख्त
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि सरकार युवाओं के भविष्य और उनकी चिंताओं को लेकर बेहद गंभीर है और खुद प्रधानमंत्री इस पूरे मामले की कड़ाई से निगरानी कर रहे हैं। इस दौरान एनटीए ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए साल 2027 से नीट की परीक्षा को पूरी तरह से ऑनलाइन में आयोजित कराने की योजना बनाई जा रही है।
इसके साथ ही, सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए अब प्रश्नपत्रों का 85 प्रतिशत अनुवाद AI तकनीक के जरिए कराया जाएगा और पेपर तैयार करने वाले शिक्षकों, जांचकर्ताओं, अनुवादकों, प्रूफ-रीडरों और अधिकारियों की पृष्ठभूमि की बेहद सख्ती से भौतिक जांच व सत्यापन किया जाएगा, ताकि परीक्षा प्रणाली में मानवीय हस्तक्षेप को कम करके गोपनीयता और विश्वसनीयता का एक नया ढांचा तैयार किया जा सके।

