भारतीय रिजर्व बैंक भारत में मौद्रिक प्रणाली को आधुनिक और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए प्लास्टिक यानी पॉलीमर के नोट चलन में लाने की बेहद गंभीर तैयारी कर रहा है। अपनी हालिया वार्षिक रिपोर्ट में केंद्रीय बैंक ने इसके साफ संकेत दिए हैं कि जल्द ही देश के भीतर पॉलीमर नोटों को लेकर एक विशेष पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत की जा सकती है।
हाल के दिनों में केंद्रीय बैंक की बोर्ड बैठकों के दौरान इस विषय पर काफी विस्तार से चर्चा की गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि आरबीआई अब प्लास्टिक करेंसी को अपनाने की दिशा में कदम आगे बढ़ा रहा है। ये नए पॉलीमर नोट वर्तमान में इस्तेमाल हो रहे पारंपरिक कागज के नोटों की तुलना में काफी ज्यादा मजबूत, टिकाऊ और लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाले होंगे।
वैश्विक स्तर पर सफल हो चुकी पॉलीमर तकनीक
पॉलीमर नोटों को अपनाने का वैश्विक इतिहास काफी पुराना और सफल रहा है, जिसकी शुरुआत सबसे पहले वर्ष 1988 में ऑस्ट्रेलिया द्वारा जारी किए गए 10 डॉलर के नोट से हुई थी। इसके बाद धीरे-धीरे दुनिया के कई अन्य देशों ने इस तकनीक को हाथों-हाथ लिया, जिसमें न्यूजीलैंड ने वर्ष 1999 में अपने सभी कागजी नोटों को चलन से बाहर कर पॉलीमर नोटों को पूरी तरह अपना लिया था।
इसी क्रम में वियतनाम ने वर्ष 2003 में और रोमानिया ने वर्ष 2005 में कदम बढ़ाते हुए कागजी नोटों को पूरी तरह प्लास्टिक में बदल दिया, जिसके बाद यह देश पहला ऐसा यूरोपीय राष्ट्र बना जिसने इस तकनीक को अपनाया। हालांकि, अगर दुनिया की सबसे मजबूत मानी जाने वाली अमेरिकी करेंसी यानी डॉलर की बात की जाए, तो वह आज भी पूरी तरह से प्लास्टिक सामग्री से निर्मित नहीं होती है।
सुरक्षा फीचर्स और ATM मशीनों का अपग्रेडेशन
इससे पहले वर्ष 2012 के दौरान भी भारतीय रिजर्व बैंक ने देश में पॉलीमर नोटों को लाने की एक योजना बनाई थी, लेकिन कुछ तकनीकी दिक्कतों के चलते उस वक्त इस प्रोजेक्ट को रोकना पड़ा था। अब जबकि तकनीक में कई बड़े सुधार आ चुके हैं, तब आरबीआई ने नोटों को तैयार करने से लेकर ATM मशीनों को अपडेट करने तक की प्रक्रिया को काफी दुरुस्त कर लिया है, जिससे इन नोटों को मशीनों में डालने और निकालने की प्रक्रिया बेहद आसान हो जाएगी।
हालांकि बैंक ने इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन यह साफ किया है कि नोटों की गुणवत्ता, सुरक्षा और मजबूती को बढ़ाने के लिए उनकी आंतरिक सामग्री में व्यापक सुधार करने का काम बहुत तेजी से चल रहा है।
बैंकिंग धोखाधड़ी के मामलों में आई गिरावट
आरबीआई की रिपोर्ट में देश के भीतर होने वाले वित्तीय अपराधों और धोखाधड़ी को लेकर भी महत्वपूर्ण आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं। समीक्षा के अधीन बीते वित्तीय वर्ष में विभिन्न बैंकों और वित्तीय संस्थानों के भीतर 48,021 करोड़ रुपये की जालसाजी से जुड़े कुल 10,114 मामले दर्ज किए गए, जबकि इसके पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 23,722 मामलों के साथ 32,803 करोड़ रुपये के करीब था। इस प्रकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में होने वाले धोखाधड़ी के मामलों की कुल संख्या में सालाना आधार पर एक बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जो बैंकिंग सुरक्षा व्यवस्था में हुए सुधारों को प्रदर्शित करती है।

