उपभोक्ता सावधान ! सामान खराब होने पर रिफंड चाहिए, तो रसीद पर जरूर लिखवाएं वस्तु की पूरी जानकारी

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किसी भी वस्तु या सेवा को खरीदते समय उसकी पक्की रसीद पर केवल कीमत लिखवा लेना ही काफी नहीं है। उपभोक्ताओं को खरीदारी करते समय रसीद पर वस्तु की सटीक कीमत के साथ-साथ उसके ब्रांड का नाम, मॉडल और खरीदी गई कुल मात्रा का पूरा और स्पष्ट विवरण अनिवार्य रूप से लिखवाना चाहिए।

अक्सर देखा जाता है कि उचित और पूरा विवरण न होने के कारण यदि खरीदी गई वस्तु बाद में खराब या त्रुटिपूर्ण निकलती है, तो उपभोक्ता आयोग से उसका रिफंड या मुआवजा प्राप्त करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई मामलों में तो रसीद पर पर्याप्त जानकारी न होने की वजह से उपभोक्ताओं के जायज दावे भी पूरी तरह खारिज हो जाते हैं, इसलिए किसी भी सेवा या सामान का उपयोग करते समय ग्राहकों को यह सावधानी शुरुआत से ही बरतनी चाहिए।

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वस्तु खराब होने पर शिकायत दर्ज कराने की सही प्रक्रिया

यदि आपके द्वारा खरीदा गया कोई सामान खराब निकलता है और आप उसके बदले अपनी धनराशि वापस लेना चाहते हैं, तो इसके लिए सबसे पहले आपको संबंधित दुकानदार या विक्रेता से एक मौखिक शिकायत करनी चाहिए। यदि दुकानदार के स्तर पर आपकी समस्या का समाधान नहीं होता है, तो सामान की पक्की रसीद की फोटोकॉपी संलग्न करते हुए विक्रेता को एक लिखित शिकायत दर्ज करानी चाहिए और इसके बाद ही उपभोक्ता फोरम का रुख करना चाहिए।

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राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उत्तराखंड की सदस्य कुमकुम रानी के अनुसार, वस्तुओं की बिक्री के समय अक्सर विक्रेता रसीद पर ब्रांड का नाम छोड़ देते हैं, जिससे विवाद होने पर बड़ी कंपनियां उस उत्पाद को अपना मानने से ही साफ इनकार कर देती हैं।

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ग्राहकों को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए इस कानूनी प्रक्रिया और उपभोक्ता अदालतों के वित्तीय क्षेत्राधिकार को भी समझना होगा, जिसके तहत 50 लाख रुपये तक की कीमत के मामलों की सुनवाई जिला उपभोक्ता फोरम में होती है, जबकि 50 लाख रुपये से अधिक और दो करोड़ रुपये तक के मामले राज्य स्तरीय उपभोक्ता आयोग के समक्ष उठाए जा सकते हैं, तथा दो करोड़ रुपये से अधिक के बड़े वित्तीय मामलों की सुनवाई सीधे राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग द्वारा की जाती है।