देहरादून में निवेश के नाम पर 15 लोगों से 36 लाख की ठगी, हरियाणा के जालसाजों समेत 7 पर केस दर्ज

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उत्तराखंड की राजधानी देहरादून और तीर्थ नगरी ऋषिकेश में आकर्षक रिटर्न का लालच देकर मासूम निवेशकों को अपनी ठगी का शिकार बनाने वाला एक बड़ा कॉरपोरेट धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जहाँ निवेश के नाम पर करीब 15 स्थानीय निवासियों से 36 लाख रुपये की मोटी रकम ऐंठ कर शातिर जालसाज रातों-रात फरार हो गए।

इस गंभीर आर्थिक अपराध का संज्ञान लेते हुए पटेलनगर थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है और ठगी के इस पूरे खेल को अंजाम देने वाले हरियाणा के दो मुख्य निवासियों समेत कुल सात आरोपियों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कर लिया है।

पुलिस के अनुसार, इन शातिर अपराधियों ने सुनियोजित तरीके से फर्जी वित्तीय कम्पनियां खड़ी की थीं और शुरुआत में लोगों का भरोसा जीतने के लिए कुछ महीनों तक समय पर लाभांश भी दिया, लेकिन जैसे ही इनके पास एक बड़ी पूंजी जमा हो गई, इन्होंने न सिर्फ भुगतान पूरी तरह बंद कर दिया बल्कि अपनी मूल रकम वापस मांगने वाले निवेशकों को जान से मारने की खुली धमकियां भी देने लगे।

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चार गुना रकम करने का झूठा झांसा

इस संगठित ठगी नेटवर्क का शिकार हुए पटेलनगर निवासी जगेश गर्ग द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, साल 2023 में आरोपियों ने उन्हें अपनी ‘डीवीएस वेंचर्स’ नामक कंपनी में पैसा लगाने के लिए राजी किया था।

जालसाजों ने बेहद शातिर तरीके से यह झूठा दावा किया था कि उनकी योजना में लगाया गया पैसा मात्र पांच साल के भीतर चार गुना कर दिया जाएगा, जिसके झांसे में आकर देहरादून और ऋषिकेश के करीब 15 लोगों ने अपनी जीवन भर की गाढ़ी कमाई के कुल 36 लाख रुपये कंपनी में लगा दिए।

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जब निवेशकों ने भुगतान रुकने पर अपना मूल पैसा वापस पाने के लिए लगातार दबाव बनाया, तो कंपनी के निदेशकों ने उन्हें कुछ चेक थमा दिए, जो बैंक में लगाने पर बाउंस हो गए, जिससे पीड़ित परिवारों को अपने साथ हुई इस बड़ी धोखाधड़ी का अहसास हुआ।

देहरादून में सक्रिय थीं चार फर्जी कंपनियां

जांच में यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने देहरादून के भीतर ‘डीवीएस वेंचर्स’, ‘द्रोनवीर एकेडमी’, ‘बीसीपी इंडिया’ और ‘द बीसीपी इंडिया को-ऑपरेटिव मल्टीपर्पज सोसायटी लिमिटेड (कैथल)’ के नाम से चार अलग-अलग फर्जी फर्म खोल रखी थीं, जिनके जरिए सैकड़ों अन्य लोगों से भी निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये की हेराफेरी किए जाने की आशंका है।

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इस बड़ी धोखाधड़ी के सामने आने के बाद मुख्य पीड़ित ने सूबे के मुख्यमंत्री और एसएसपी से गुहार लगाई है कि वे तत्काल प्रभाव से इन जालसाजों की कंपनियों के व्यावसायिक लाइसेंस निरस्त करें, इनके पासपोर्ट जब्त कर इन्हें विदेश भागने से रोकें और इनकी चल-अचल संपत्तियों की गहन जांच कराकर कुर्की की जाए ताकि पीड़ित निवेशकों का डूबा हुआ पैसा वापस मिल सके। पुलिस ने इस मामले में संजीव देशवाल, धर्मपाल मोगा, आरोही मलिक उर्फ अंजलि, नरेंद्र गर्ग, संजीव पूंडरी, परमप्रीत मारवाह और नवीन के खिलाफ संगीन धाराओं में केस दर्ज कर उनकी तलाश तेज कर दी है।

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