उत्तराखंड हाईकोर्ट का बड़ा कदम: चंपावत कथित गैंगरेप मामले में आरोपी की जमानत पर सरकार से मांगा जवाब

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उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने चंपावत जिले में हुए एक कथित सामूहिक दुराचार प्रकरण में साजिश रचने के आरोपी और न्यायिक हिरासत में जेल में बंद कांग्रेस नेता आनंद सिंह महरा की जमानत याचिका पर सुनवाई की। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की एकलपीठ ने राज्य सरकार को कड़ा रुख अपनाते हुए अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।

आरोपी नेता ने हाईकोर्ट में खुद को पूरी तरह निर्दोष बताते हुए राहत की गुहार लगाई है और वह बीती 13 मई 2026 से जेल में बंद है; अब इस संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई आगामी 15 जून को तय की गई है।

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इसके साथ ही एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने सितारगंज चीनी मिल के मृतक आश्रित कोटे के कर्मचारियों के बकाए भुगतान और समायोजन को लेकर दायर याचिका का निस्तारण करते हुए औद्योगिक सचिव को उनके प्रत्यावेदन पर गंभीरता से विचार करने का आदेश दिया है।

चंपावत कथित सामूहिक दुराचार का पूरा घटनाक्रम और कानूनी धाराएं

इस गंभीर आपराधिक मामले के घटनाक्रम के अनुसार, बीती 5 मई 2026 की रात को चंपावत के एक सीमावर्ती गांव में आयोजित शादी समारोह में शामिल होने गई एक किशोरी संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थी, जो बाद में एक दूध डेयरी के पास हाथ-पांव बंधे हुए बेहद आपत्तिजनक और नग्न अवस्था में पाई गई थी। इस स्तब्ध करने वाली घटना को लेकर पीड़िता के पिता की शिकायत पर अगले ही दिन 6 मई को पुलिस ने मुकदम दर्ज किया था।

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पुलिस ने प्रारंभिक तफ्तीश के आधार पर पूरन रावत, विनोद रावत और नवीन रावत नामक युवकों की संलिप्तता की आशंका जताई थी और इस साजिश में मदद करने के आरोप में कांग्रेस नेता आनंद सिंह महरा को गिरफ्तार किया था, जिनके खिलाफ पॉक्सो अधिनियम की विभिन्न धाराओं तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(2) के तहत प्राथमिक दर्ज है; हालांकि शुरुआती मेडिकल जांच में दुराचार और जबरदस्ती की स्पष्ट पुष्टि नहीं हुई है।