ईद के मौके पर देहरादून में उठी बड़ी मांग: मुस्लिम समाज ने की गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की अपील

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देहरादून में ईद-उल-अजहा का त्योहार बेहद अकीदत, उल्लास और आपसी भाईचारे के साथ मनाया गया। जिले की लगभग 81 ईदगाहों और मस्जिदों में नमाज अदा की गई, जहां देश और प्रदेश में सुख, शांति, समृद्धि तथा आपसी सौहार्द के लिए विशेष दुआएं मांगी गईं। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी और घरों में जाकर लजीज व्यंजनों का लुत्फ उठाया।

इस पावन अवसर पर सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। शहर काजी सैय्यद अशरफ हुसैन कादरी सहित विभिन्न धर्मगुरुओं ने इस मौके पर मोहब्बत, अमन और इंसानियत का पैगाम देते हुए लोगों से नफरत फैलाने वाली ताकतों से दूर रहकर देश की एकता को मजबूत करने की अपील की।

गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग

इस ईद पर देहरादून में एक बेहद अनोखी और सकारात्मक पहल देखने को मिली, जिसने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। नमाज के बाद मुस्लिम सेवा संगठन के उपाध्यक्ष आकिब कुरैशी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने चकराता रोड के समीप हाथों में प्लेकार्ड लेकर शांतिपूर्ण तरीके से ‘गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने’ की पुरजोर मांग उठाई।

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संगठन का कहना है कि गाय भारतीय संस्कृति, सभ्यता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है और देश के करोड़ों लोग इसे गहरी आस्था की दृष्टि से देखते हैं। मुस्लिम समाज हमेशा से देश में आपसी भाईचारे और एकता का समर्थक रहा है, इसलिए उन्होंने सरकार से गाय के संरक्षण और संवर्धन के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की।

इस दौरान नेताजी संघर्ष समिति के प्रमुख महासचिव आरिफ वारसी और उपाध्यक्ष प्रभात डंडरियाल सहित कई गणमान्य लोगों ने भी इस मांग का समर्थन किया और ईद की बधाई दी।

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स्वास्थ्य केंद्रों में छुट्टी को लेकर उपजा विवाद

एक तरफ जहां त्योहार की खुशियां मनाई जा रही थीं, वहीं दूसरी ओर देहरादून जिले के अर्बन हेल्थ वेलनेस सेंटरों में बकरीद के मौके पर केवल कुछ ही डॉक्टरों और कर्मचारियों को छुट्टी दिए जाने का मामला गरमा गया। इस फैसले का डॉक्टरों और स्टाफ द्वारा कड़ा विरोध किया गया, जिसके बाद प्रबंधन ने विरोध करने वाले चार डॉक्टरों को ऑफिशियल व्हाट्सएप ग्रुप से बाहर निकाल दिया और उनके द्वारा उठाए गए सवालों के संदेश भी डिलीट कर दिए। डॉक्टरों ने इस कार्रवाई पर गहरी आपत्ति जताते हुए कहा कि राजकीय अवकाश सभी के लिए समान होता है और इस तरह का भेदभावपूर्ण आदेश बिल्कुल भी ठीक नहीं है, छुट्टी का लाभ सभी कर्मचारियों को मिलना चाहिए।

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मसूरी में भी रहा ईद का हर्षोल्लास

देहरादून के साथ-साथ पर्यटन नगरी मसूरी में भी बकरीद का पर्व पूरे उत्साह और शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। यहां की विभिन्न मस्जिदों में ईद की नमाज अदा कर देश व परिवार की खुशहाली की कामना की गई। नमाज के बाद लंढौर, कुलड़ी, लाइब्रेरी और धोबीघाट जैसी जगहों पर लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर पर्व की बधाई दी।

सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने सभी संवेदनशील स्थानों और मस्जिदों के आसपास कड़े इंतजाम किए थे और आला अधिकारियों ने खुद क्षेत्रों का भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया ताकि शांति भंग करने वाले असामाजिक तत्वों पर कड़ी नजर रखी जा सके।

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