मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला, सार्थक-पीडीएस योजना 5 साल के लिए बढ़ी, खर्च होंगे 25,530 करोड़ रुपये

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देश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने सार्थक-पीडीएस योजना को अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ाने का एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस योजना को मार्च 2031 तक जारी रखने की प्रशासनिक मंजूरी प्रदान की गई है।

इस महत्वाकांक्षी विस्तार के लिए सरकार द्वारा कुल 25,530 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट का वित्तीय प्रावधान किया गया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट बैठक के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि यह कदम आधुनिक प्रौद्योगिकी और तकनीकी सुधारों के जरिए देश के सार्वजनिक वितरण ऊंचे ढांचे में व्यापक और आमूलचूल परिवर्तन लाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

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विलय का मुख्य मकसद और प्रशासनिक ढांचा

सार्थक-पीडीएस योजना को 16वें वित्त आयोग चक्र की अवधि यानी अप्रैल 2026 से मार्च 2031 के दौरान एक बड़ी छतरी योजना के रूप में पूरी तरह लागू करने का निर्णय लिया गया है। इस कदम के तहत दो बड़ी मौजूदा योजनाओं को समाहित किया गया है, जिसमें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत राज्य एजेंसियों को अनाज के परिवहन के लिए वित्तीय सहायता देना और उचित मूल्य की दुकानों के वितरक मार्जिन के लिए दी जाने वाली सहायता शामिल है।

इन दोनों योजनाओं को आपस में मिलाने का मुख्य उद्देश्य वित्तीय सहायता और तकनीकी आधुनिकीकरण को एक ही एकीकृत प्रशासनिक ढांचे के अंतर्गत लाना है, जिससे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन को व्यापक रूप से सुधारा और सुदृढ़ किया जा सके।

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राशन दुकान वितरकों का बढ़ेगा पारिश्रमिक

आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में अनाज के परिवहन, प्रबंधन और राशन दुकानों के वितरकों के मार्जिन के लिए दी जाने वाली केंद्रीय सहायता के मानकों में संशोधन को हरी झंडी दे दी है। इस योजना के तहत अब एफपीएस वितरकों के पारिश्रमिक को बढ़ाया जाएगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।

इसके अलावा, कई राज्यों को राशन की दुकानों तक अनाज पहुंचाने की भारी लागत उठाने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन अब इस नई केंद्रीय योजना के माध्यम से उन्हें सीधे वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि इसके लिए वित्तपोषण का मौजूदा ढांचा पहले की तरह ही बरकरार रखा गया है।

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AI और आधुनिक तकनीकों से लैस होगी नई व्यवस्था

तकनीकी मोर्चे पर इस योजना को पूरी तरह डिजिटल और स्मार्ट बनाने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल प्रस्तावित किया गया है। इसके अंतर्गत कृत्रिम मेधा, मशीन लर्निंग, प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण और ब्लॉकचेन जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियों को लागू किया जाएगा।

इन आधुनिक तकनीकों की मदद से वास्तविक समय में खाद्यान्न वितरण की निगरानी के लिए एक एकीकृत डेटाबेस और एआई-आधारित शिकायत निवारण प्रणाली स्थापित की जाएगी। पारदर्शिता, सुरक्षा और परिचालन स्थिरता को वैश्विक मानकों के अनुरूप सुनिश्चित करने के लिए राज्यों में नियंत्रण एवं निगरानी केंद्र स्थापित किए जाएंगे और साथ ही आईएसओ प्रमाणित प्रक्रिया फ्रेमवर्क को भी पूरी तरह लागू किया जाएगा।

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