पश्चिम एशिया में जारी गंभीर भू-राजनीतिक संकट के मद्देनजर केंद्र सरकार ने देशवासियों से एक महत्वपूर्ण अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाह या अफरातफरी में आकर पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की जरूरत से ज्यादा खरीदारी न करें। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में गठित अनौपचारिक मंत्रिस्तरीय समूह की छठी बैठक में बुधवार को देश में ईंधन, खाद और अन्य आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता की गहन समीक्षा की गई, जिसके बाद सरकार ने स्पष्ट किया कि पूरे देश में आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह सुचारू और सामान्य बनी हुई है।
इस उच्च स्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर बदलती परिस्थितियों के बीच भारत की तैयारियों का आकलन करना और आपूर्ति श्रृंखला को और मजबूत बनाना था। बैठक के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर भी देश को आश्वस्त किया कि सरकार सभी आवश्यक वस्तुओं की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। इस बैठक में जेपी नड्डा, मनोहर लाल, हरदीप सिंह पुरी और प्रहलाद जोशी सहित कई केंद्रीय मंत्रियों ने हिस्सा लिया।
खरीफ सीजन से पहले खाद की उपलब्धता की गहन समीक्षा
इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान देश में कृषि क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए खरीफ की बुवाई से पहले खाद की उपलब्धता की भी विस्तार से समीक्षा की गई। वर्ष 2026 के आगामी खरीफ सत्र के लिए देश में खाद की कुल आवश्यकता लगभग 390.54 लाख मीट्रिक टन अनुमानित की गई है, जिसके मुकाबले वर्तमान में लगभग 200.47 लाख मीट्रिक टन की उपलब्धता पहले से ही सुनिश्चित कर ली गई है, जो कुल आवश्यकता के 51 प्रतिशत से भी अधिक है।
इसके अलावा, घरेलू उत्पादन और आयात के माध्यम से करीब 122.4 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त उर्वरक को उपलब्धता शृंखला में जोड़ा गया है; साथ ही मई और जून के महीनों के दौरान भारतीय बंदरगाहों पर 15 लाख मीट्रिक टन डीएपी और 10 लाख मीट्रिक टन एनपीके पहुंचने की पूरी उम्मीद है, जिससे किसानों को सीजन में किसी भी तरह की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा।
कालाबाजारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने आम उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार द्वारा जारी एक बयान में बताया गया है कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियो ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन के दामों में हुई भारी वृद्धि का बोझ देश के खुदरा उपभोक्ताओं पर नहीं डाला है और आम जनता की जेब को सुरक्षित रखने के लिए ये कंपनियां वर्तमान में लगभग 550 करोड़ रुपये प्रति दिन का भारी नुकसान खुद वहन कर रही हैं।
हालांकि, बैठक में इस बात पर चिंता भी जताई गई कि कुछ बड़े औद्योगिक उपभोक्ता कम संरक्षित कीमतों का गलत लाभ उठाने के लिए खुदरा ईंधन बाजार की ओर रुख कर रहे हैं, और कुछ डीलर इस स्थिति का फायदा उठाकर कालाबाजारी करने की कोशिश कर रहे हैं; सरकार ने इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए चेतावनी दी है कि ऐसे तत्वों के खिलाफ प्रवर्तन की कार्रवाई को काफी तेज कर दिया गया है।

