उत्तराखंड में बंद पड़ी दवा फैक्ट्रियों की आड़ में चल रहे अवैध और नकली दवाओं के निर्माण को लेकर राज्य सरकार ने बेहद सख्त रुख अपना लिया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने देहरादून और हरिद्वार जिले में स्थित ऐसी 26 फार्मा कंपनियों की सूची स्पेशल टास्क फोर्स को जांच के लिए सौंप दी है।
हाल ही में एसटीएफ द्वारा की गई एक बड़ी कार्रवाई में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ था कि जिन फैक्ट्रियों को कागजों में बंद दिखाया गया है, उनके भीतर अवैध रूप से नकली दवाएं बनाई जा रही हैं और इन नकली दवाइयों को विभिन्न ऑनलाइन माध्यमों और प्लेटफॉर्म के जरिए धड़ल्ले से बाजार में बेचा जा रहा है।
इस गंभीर मामले को देखते हुए औषधि प्रशासन विभाग ने पहले ही इन सभी संदिग्ध कंपनियों के दवा निर्माण लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए थे और अब इनकी पूरी सूची एसटीएफ के हवाले कर दी गई है।
इस पूरे मामले पर विस्तृत जानकारी देते हुए एफडीए के अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने बताया कि पूर्व में देहरादून के सेलाकुई और हरिद्वार जिले के सिडकुल, बहादराबाद तथा लक्सर जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में स्थापित इन फार्मा कंपनियों की दवाइयों के सैंपल जांच में फेल पाए गए थे।
दवाओं की गुणवत्ता मानक के अनुरूप न होने के कारण ही विभाग द्वारा इन सभी कंपनियों के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए उनके लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई की गई थी। अब एसटीएफ को यह सूची सौंपने का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि जिन 26 फार्मा कंपनियों को वर्तमान में दवा बनाने की अनुमति नहीं है, उनके बंद परिसरों के भीतर इस समय किस तरह की संदिग्ध गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। विभाग की ओर से भेजी गई इस गोपनीय सूचना के आधार पर अब इन बंद फैक्ट्रियों की जमीनी स्तर पर सघन जांच की जाएगी।
उत्तराखंड में बंद पड़ी दवा फैक्ट्रियों की आड़ में चल रहे अवैध और नकली दवाओं के निर्माण को लेकर राज्य सरकार ने बेहद सख्त रुख अपना लिया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने देहरादून और हरिद्वार जिले में स्थित ऐसी 26 फार्मा कंपनियों की सूची स्पेशल टास्क फोर्स को जांच के लिए सौंप दी है।
हाल ही में एसटीएफ द्वारा की गई एक बड़ी कार्रवाई में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ था कि जिन फैक्ट्रियों को कागजों में बंद दिखाया गया है, उनके भीतर अवैध रूप से नकली दवाएं बनाई जा रही हैं और इन नकली दवाइयों को विभिन्न ऑनलाइन माध्यमों और प्लेटफॉर्म के जरिए धड़ल्ले से बाजार में बेचा जा रहा है।
इस गंभीर मामले को देखते हुए औषधि प्रशासन विभाग ने पहले ही इन सभी संदिग्ध कंपनियों के दवा निर्माण लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए थे और अब इनकी पूरी सूची एसटीएफ के हवाले कर दी गई है।
इस पूरे मामले पर विस्तृत जानकारी देते हुए एफडीए के अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने बताया कि पूर्व में देहरादून के सेलाकुई और हरिद्वार जिले के सिडकुल, बहादराबाद तथा लक्सर जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में स्थापित इन फार्मा कंपनियों की दवाइयों के सैंपल जांच में फेल पाए गए थे।
दवाओं की गुणवत्ता मानक के अनुरूप न होने के कारण ही विभाग द्वारा इन सभी कंपनियों के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए उनके लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई की गई थी। अब एसटीएफ को यह सूची सौंपने का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि जिन 26 फार्मा कंपनियों को वर्तमान में दवा बनाने की अनुमति नहीं है, उनके बंद परिसरों के भीतर इस समय किस तरह की संदिग्ध गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। विभाग की ओर से भेजी गई इस गोपनीय सूचना के आधार पर अब इन बंद फैक्ट्रियों की जमीनी स्तर पर सघन जांच की जाएगी।

