सात समंदर पार खटक रही सनातन की पैरवी! CM धामी समेत योगी और हिमंता पर निशाना

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भारत में सनातन संस्कृति, हिंदू गौरव और राष्ट्रहित की बुलंद होती आवाज़ अब सात समंदर पार बैठे कुछ विदेशी संगठनों और वामपंथी-लिबरल एक्टिविस्टों को बुरी तरह चुभने लगी है। अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग की एक हालिया सुनवाई के दौरान भारतीय लोकतंत्र और उसकी संप्रभुता पर सीधा प्रहार करने का प्रयास किया गया।

इस अंतरराष्ट्रीय मंच का दुरुपयोग करते हुए एक एक्टिविस्ट रक़ीब अहमद नाइक द्वारा भारत की हिंदुत्व विचारधारा और राष्ट्रवादी संगठनों को न सिर्फ बदनाम किया गया, बल्कि देश के तीन प्रमुख मुख्यमंत्रियों पर प्रतिबंध लगाने जैसी हास्यास्पद मांग भी उठा दी गई। यह पूरी कवायद असल में उन ताकतों की गहरी छटपटाहट को दर्शाती है, जो भारत को अपनी जड़ों, सांस्कृतिक पहचान और सभ्यता के गौरव के साथ एकजुट होकर आगे बढ़ता हुआ नहीं देखना चाहती हैं।

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विदेशी मंचों पर निशाना बनाए गए तीनों मुख्यमंत्रियों की लोकप्रियता का सबसे बड़ा आधार उनके द्वारा अपने-अपने राज्यों में लिए गए कड़े और ऐतिहासिक फैसले हैं। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देश में सबसे पहले समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने, सरकारी जमीनों से अवैध कब्जों को हटाने और सख्त धर्मांतरण कानून लाकर एक मिसाल कायम की है।

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ ने माफियाराज, तुष्टिकरण और कट्टरपंथ के खिलाफ कड़ा रुख अपनाकर कानून का राज स्थापित किया है, जबकि असम में हिमंता बिस्वा सरमा ने घुसपैठ और जनसांख्यिकीय असंतुलन जैसे गंभीर मुद्दों पर बिना किसी समझौते के लगातार कार्रवाई की है। अपने ही देश में अपनी जमीन, संस्कृति और मंदिरों की रक्षा के लिए उठाए गए ये सख्त कदम अब उन लोगों को खटक रहे हैं जो भारत को कमजोर देखना चाहते हैं।

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इस पूरे घटनाक्रम की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जो राजनीतिक विचारधाराएं और चेहरे भारत की मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का विश्वास और जनमत हासिल करने में लगातार नाकाम रहते हैं, वे अब विदेशी जमीन का सहारा ले रहे हैं। अमेरिकी आयोग की आड़ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक सं, बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद जैसे देशभक्त संगठनों को निशाने पर लेना यह साफ करता है कि यह हमला केवल तीन मुख्यमंत्रियों पर नहीं बल्कि संपूर्ण हिंदू समाज की उस सोच पर है जो अब खुलकर अपनी पहचान और अधिकारों की बात करने लगा है। दुनिया के सामने भारत की छवि को धूमिल करने की यह अंतरराष्ट्रीय साजिश इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि जब-जब देश अपनी सनातन परंपरा की रक्षा के लिए एकजुट होता है, तब-तब भारत विरोधी ताकतों की बेचैनी सात समंदर पार तक बढ़ जाती है।