उत्तराखंड में शुरू हुआ एक सप्ताह का भारतीय भाषा समर कैंप, अनिवार्य ड्यूटी पर शिक्षकों ने खोला मोर्चा

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उत्तराखंड के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत बहुभाषी संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक सप्ताह के ‘भारतीय भाषा समर कैंप’ की शुरुआत की जा रही है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद की निदेशक वंदना गर्ब्याल ने इस संबंध में प्रदेश के सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

यह विशेष समर कैंप 27 मई से शुरू होकर आगामी 2 जून तक संचालित किया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य स्कूली बच्चों में भाषाओं के प्रति रुचि जगाना और भाषाई विविधता का विकास करना है। इसके सफल संचालन के लिए राज्य के सभी सार्वजनिक और निजी प्राथमिक विद्यालयों, उप प्राथमिक विद्यालयों, हाईस्कूलों और इंटरमीडिएट कॉलेजों में पुख्ता व्यवस्था करने को कहा गया है, जिसके तहत सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों और डाइट प्राचार्यों को आपसी तालमेल के साथ इस कैंप का आयोजन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है।

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शिक्षक संगठनों ने जताया विरोध

समर कैंप के इस सरकारी आदेश के खिलाफ प्रदेश के विभिन्न शिक्षक संगठनों ने मोर्चा खोलते हुए इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया है। राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ की प्रांतीय तदर्थ समिति के सदस्य मनोज तिवारी ने एससीईआरटी निदेशक को एक पत्र लिखकर मांग की है कि गर्मियों की छुट्टियों के दौरान होने वाले इस कैंप के संचालन को पूरी तरह स्वैच्छिक (ऑप्शनल) रखा जाए, या फिर पिछले और इस साल के समर कैंप के लिए तय बजट व धनराशि को तुरंत जारी किया जाए।

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शिक्षकों का कहना है कि यदि सरकार बजट जारी नहीं करती है, तो शिक्षकों को इस कैंप की अनिवार्य ड्यूटी से पूरी तरह अलग रखा जाना चाहिए। इसी सुर में सुर मिलाते हुए राजकीय शिक्षक संघ के पूर्व प्रांतीय महामंत्री डॉ. सोहन मांजिला ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है कि गर्मियों की वैधानिक छुट्टियों के समय समर कैंप के नाम पर शिक्षकों को जबरन काम पर बुलाना उनका मानसिक और प्रशासनिक उत्पीड़न है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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