बीते वर्ष चारधाम यात्रा के दौरान केदारनाथ धाम में आने वाले अतिथियों के आवास और भोजन व्यवस्था पर खर्च हुई लाखों रुपये की भारी-भरकम राशि के मामले में वित्तीय अनियमितताओं की आशंका को देखते हुए बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति ने एक बड़ा कदम उठाया है। समिति ने इस पूरे खर्च की निष्पक्ष जांच के लिए चार सदस्यों की एक विशेष समिति का गठन कर दिया है, जो आगामी तीन सप्ताह के भीतर मामले की सघन जांच कर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी।
बीकेटीसी के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने सोशल मीडिया पर अतिथियों के आवासीय और भोजन बिलों के नकद भुगतान को लेकर उठे विवाद को बेहद गंभीरता से लिया है। उनके सख्त निर्देश पर मुख्य कार्याधिकारी योगेंद्र सिंह ने जांच समिति के गठन के आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं।
इस जांच दल में वित्त अधिकारी हेमंत कांडपाल, अधिशासी अभियंता विपिन तिवारी, विधि अधिकारी एसएस बर्त्वाल और मुख्य प्रशासनिक अधिकारी राजन नैथानी जैसे वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है, जो इस पूरे घालमेल की सच्चाई सामने लाएंगे।
बिना अनुमति अग्रिम भुगतान और प्रोटोकॉल का उल्लंघन
इस पूरे विवाद की जड़ें पिछले साल यात्रा के शुरुआती दिनों से जुड़ी हैं, जब केदारनाथ धाम के कपाट खुलने पर वहां आने वाले अतिथियों के ठहरने और भोजन की व्यवस्था के लिए तत्कालीन व्यवस्थापक एवं प्रोटोकॉल अधिकारी अरविंद शुक्ला के एक प्रस्ताव को मुख्य कार्याधिकारी विजय थपलियाल को भेजा गया था।
इसके बाद तत्कालीन मुख्य प्रभारी अधिकारी अनिल ध्यानी की ओर से एक मई से 15 मई तक अतिथियों के आवासीय बिलों के भुगतान के लिए अतिथि सत्कार मद से छह लाख रुपये के अग्रिम भुगतान की पत्रावली पर तत्कालीन मुख्य अधिशासी अधिकारी (सीईओ) से अनुमति मांगी गई थी, जिसे सीईओ ने मंजूर कर दिया था।
हालांकि, सूत्रों के अनुसार जब मई को नए अध्यक्ष ने कार्यभार संभाला, तो इन बिलों के अंतिम भुगतान के लिए उनकी अनिवार्य अनुमति नहीं ली गई और बीकेटीसी के अधिकारियों ने आनन-फानन में आवास व भोजन के बिलों का नकद भुगतान कर दिया।
सबसे गंभीर बात यह सामने आ रही है कि जिन लोगों को यह आवासीय सुविधाएं और वीआईपी मेहमाननवाजी दी गई, वे असल में आधिकारिक प्रोटोकॉल की श्रेणी में आते ही नहीं थे, जिससे मंदिर के धन के दुरुपयोग का बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
चारधाम यात्रा में जाम से निपटने के लिए बने ठोस योजना
इसी अखबार की कटिंग में चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं से जुड़ा एक और मुख्य पहलू भी सामने आया है, जिसमें उत्तराखंड चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने धामों में श्रद्धालुओं के सुलभ और समय पर दर्शन सुनिश्चित करने के लिए सरकार से यात्रा मार्ग पर लगने वाले भीषण जाम से निपटने की एक ठोस योजना बनाने की पुरजोर मांग की है।
महापंचायत के महासचिव डॉ. बृजेश सती ने यात्रा के सफल संचालन के लिए अतिरिक्त मजिस्ट्रेट नियुक्त करने का सुझाव दिया है और बदरीनाथ धाम के दर्शन मार्ग पर लंबे समय तक कतार में खड़े रहने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए निश्चित दूरी पर एलइडी स्क्रीन लगाने की बात कही है क्योंकि वर्तमान में लागू टोकन व्यवस्था धरातल पर प्रभावी साबित नहीं हो रही है।
इसके साथ ही महापंचायत ने यमुनोत्री धाम में घोड़ा व डोली पार्किंग के निर्माण और मुख्य पैदल मार्गों के चौड़ीकरण, बदरीनाथ धाम में पुलिस जवानों की तैनाती बढ़ाने, गंगोत्री धाम में निरंतर पेयजल के लिए दो टैंकों का निर्माण कराने, बिजली आपूर्ति सुचारू करने के लिए 33 केवी लाइन से जोड़ने और धामों में कूड़ा-कचरा फैलाने वालों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की है।

