उत्तराखंड के शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए राज्य सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है, जिसके तहत अब प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों की अनिवार्य रूप से ग्रेडिंग की जाएगी। इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए राज्य में एक स्वतंत्र नियामक निकाय के रूप में ‘राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण’ का गठन किया जा रहा है, जो तय मानकों के आधार पर स्कूलों का मूल्यांकन कर उन्हें आधिकारिक प्रमाणपत्र प्रदान करेगा।
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद ने अपर निदेशक पदमेंद्र सकलानी के नेतृत्व में इस प्राधिकरण के गठन को लेकर आ रही सभी आपत्तियों का निपटारा करते हुए एक नया संशोधित प्रारूप तैयार कर शासन को अपनी मंजूरी के लिए भेज दिया है। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य राज्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना, निजी स्कूलों द्वारा आर्थिक लाभ के लिए किए जा रहे शिक्षा के व्यवसायीकरण पर पूरी तरह रोक लगाना और अभिभावकों को भारी-भरकम फीस व अन्य माध्यमों से होने वाले आर्थिक शोषण से बचाना है।
यह प्राधिकरण एक बारह सदस्यीय स्वतंत्र बोर्ड होगा जिसके सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष का रहेगा और यह जनता की सहूलियत के लिए एक मजबूत व सुलभ सार्वजनिक शिकायत निवारण तंत्र के रूप में भी कार्य करेगा।
सुचारू संचालन के लिए चार विशेष समितियों का गठन
इस नवगठित राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण को जमीनी स्तर पर पारदर्शी और प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए कुल चार विशेष समितियां गठित की जाएंगी, जो अलग-अलग स्तर पर व्यवस्था की निगरानी करेंगी। इन समितियों में मुख्य रूप से अपीलीय समिति, प्रत्यायन समिति, तकनीकी समिति और प्रशासनिक कार्यालय शामिल रहेंगे, जहां यदि कोई विद्यालय अपने मूल्यांकन या मिली हुई ग्रेडिंग से संतुष्ट नहीं होगा, तो वह अपीलीय समिति के समक्ष अपनी निष्पक्ष अपील दर्ज करा सकेगा।
इसके साथ ही, प्रत्यायन समिति ऑनलाइन आवेदन के बाद स्कूलों द्वारा किए गए स्वप्रमाणीकरण के दावों की बारीकी से जांच कर उसमें सुधार के जरूरी सुझाव देगी, जबकि तकनीकी समिति ऑनलाइन आवेदनों से जुड़े तकनीकी प्रस्तावों को तैयार कर अंतिम निर्णय के लिए प्रत्यायन समिति के सामने प्रस्तुत करने का कार्य करेगी।
शिक्षा महानिदेशालय में स्थापित होगा अलग कार्यालय
प्राधिकरण के दैनिक कार्यों और प्रशासनिक प्रबंधन को सुचारू रूप से चलाने के लिए शिक्षा महानिदेशालय परिसर के भीतर ही एक पूरी तरह से अलग और समर्पित कार्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इस विशेष कार्यालय में अधिकारियों की पदस्थापना के साथ-साथ आउटसोर्सिंग के माध्यम से भी योग्य कार्मिकों की बड़े पैमाने पर तैनाती की जाएगी।
प्रशासनिक ढांचे की बात करें तो इस प्राधिकरण में एक अध्यक्ष, एक सदस्य सचिव, एक वित्त नियंत्रक और एक उप निदेशक जैसे उच्च पद प्रस्तावित किए गए हैं, जिनके सहयोग के लिए दो सहायक निदेशक, विधि विशेषज्ञ और प्रशासनिक अधिकारी भी तैनात रहेंगे। कार्यालय के कामकाज को डिजिटल और आधुनिक बनाए रखने के लिए अन्य सहायक स्टाफ के रूप में वैयक्तिक सहायक, कनिष्ठ सहायक, लेखाकार, प्रोग्रामर और कंप्यूटर ऑपरेटर भी शामिल किए जाएंगे, जिसमें प्राधिकरण के अध्यक्ष और सदस्यों के लिए अधिकतम आयु सीमा 68 वर्ष निर्धारित की गई है।

