देहरादून के नए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने संभाला कार्यभार,विकास और जनकल्याण को बताया प्राथमिकता

ख़बर शेयर करें

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून को नया प्रशासनिक नेतृत्व मिल गया है, जहाँ 2012 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सोमवार को आधिकारिक तौर पर जिलाधिकारी का पदभार ग्रहण कर लिया है। कार्यभार संभालते ही उन्होंने कोषागार का निरीक्षण करते हुए पेंशनरों के डिजिटल सत्यापन और अभिलेखों के सुरक्षित रख-रखाव पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।

डॉ. चौहान ने स्पष्ट किया है कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पहुँचाना, चारधाम यात्रा का सुदृढ़ प्रबंधन, आपदा प्रबंधन कार्यों को गति देना और जिले की विकास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।

यह भी पढ़ें -  देहरादून में आग का कहर: वनों से लेकर रिहायशी इलाकों तक 21 जगह लगी आग, हाई अलर्ट पर फायर ब्रिगेड

डॉ. आशीष चौहान का प्रशासनिक सफर

डॉ. आशीष चौहान इससे पहले पिथौरागढ़, उत्तरकाशी और पौड़ी जैसे महत्वपूर्ण जिलों में बतौर जिलाधिकारी अपनी उत्कृष्ट सेवाएं दे चुके हैं, जहाँ उनके तकनीक-आधारित और जनहितकारी कार्यों को राज्य स्तर पर काफी सराहना मिली। विशेष रूप से पौड़ी गढ़वाल में उनके कार्यकाल के दौरान सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ‘सेफ सफर ऐप’ और उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की सटीक निगरानी के लिए ‘काव्या ऐप’ की शुरुआत की गई थी, जिसने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने में प्रभावी भूमिका निभाई।

यह भी पढ़ें -  देहरादून में युवक के मुंह पर कालिख मलने वालों पर दर्ज होगा मुकदमा, एसपी सिटी ने दिए निर्देश

इसके अतिरिक्त, उनके नेतृत्व में धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विकसित किया जा रहा ‘त्रिशूल पार्क’ भी एक बेहद महत्वाकांक्षी परियोजना माना जा रहा है, जिससे उनकी पहचान तकनीक और मानवीय संवेदनशीलता के समन्वय वाले अधिकारी के रूप में स्थापित होती है।

निवर्तमान जिलाधिकारी सविन बंसल की उपलब्धियां

देहरादून के पूर्व जिलाधिकारी सविन बंसल का स्थानांतरण अब सचिवालय में कर दिया गया है, जिनका सितंबर 2024 से शुरू हुआ कार्यकाल जनता के साथ सीधे जुड़ाव के लिए हमेशा याद किया जाएगा। अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ‘नंदा-सुनंदा’ जैसी सराहनीय पहल की शुरुआत की, और साथ ही भिक्षावृत्ति व कूड़ा बीनने वाले बच्चों के पुनर्वास के लिए एक व्यापक अभियान चलाया।

यह भी पढ़ें -  उत्तराखंड के 21 शहरों में जमीन पर अटका कूड़ा प्रबंधन, जानिए क्यों लटकी योजनाएं

नियमित जनसुनवाई और आम जनता की शिकायतों का त्वरित व प्रभावी निस्तारण करने की अनूठी कार्यशैली के कारण उन्हें जनता के बीच “पीपुल्स एडमिनिस्ट्रेटर” के रूप में एक बेहद लोकप्रिय पहचान मिली।

ADVERTISEMENTS Ad Ad Ad