पिथौरागढ़ के सरकारी दफ्तरों और बैठकों में मोबाइल ले जाने पर लगी रोक, बिना इजाजत नहीं बनेगी अफसरों की वीडियो

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पिथौरागढ़ जिले के सरकारी दफ्तरों में अब आम लोग अपनी मर्जी से मोबाइल फोन नहीं ले जा सकेंगे। पिथौरागढ़ में विभागीय बैठकों, जनसुनवाई दिवस और तमाम प्रशासनिक कार्यों के संचालन के दौरान किसी भी आम आदमी द्वारा अधिकारियों की वीडियो रिकॉर्डिंग करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।

सोमवार को पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी आशीष कुमार भटगांई ने शासकीय कार्यों की गोपनीयता और प्रशासनिक मर्यादा का हवाला देते हुए इस संबंध में कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन का मानना है कि इस कदम से सरकारी कामकाज को बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप और अनुशासन के साथ पूरा करने में मदद मिलेगी।

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सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल करने और गोपनीयता भंग होने पर चिंता

इस कड़े फैसले के पीछे की वजह को स्पष्ट करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि कई बार ऐसा देखा गया है कि लोग बिना किसी पूर्व अनुमति के प्रशासनिक अधिकारियों और बैठकों की वीडियो बना लेते हैं और बाद में उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर देते हैं।

इस तरह की अनधिकृत गतिविधियों से न सिर्फ प्रशासनिक कार्यवाही की गंभीरता कम होती है, बल्कि शासकीय कार्यों की गोपनीयता भी बुरी तरह प्रभावित होती है। डीएम ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि इस प्रकार के गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार को अब कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा और व्यवस्था को बनाए रखने के लिए नियमों का सख्ती से पालन करवाया जाएगा।

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मोबाइल जमा करने की व्यवस्था, कड़ी कार्रवाई और मीडिया को विशेष छूट

नए नियमों के सुचारू क्रियान्वयन के लिए जिलाधिकारी ने निर्देशित किया है कि कलेक्ट्रेट सभागार, जनसुनवाई कक्ष और विभिन्न विभागीय बैठकों में आने वाले सभी लोगों के मोबाइल फोन परिसर में प्रवेश करने से पहले ही बाहर सुरक्षित स्थान पर जमा करा लिए जाएं।

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इसके साथ ही उन्होंने कड़े लहजे में चेताया है कि यदि कोई भी व्यक्ति इन नियमों का उल्लंघन करते हुए या चोरी-छिपे वीडियो बनाते हुए पकड़ा जाता है, तो उसके खिलाफ तत्काल कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। हालांकि, इस व्यवस्था में सूचना विभाग के अधिकारियों और प्रशासन द्वारा अधिकृत पत्रकारों को उनके निर्धारित कवरेज और पेशेवर दायित्वों को निभाने के लिए आवश्यक छूट जारी रहेगी।

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