MDDA का फोकस सिर्फ पार्किंग पर नहीं पर्यावरण सरंक्षण पर भी है- बंशीधर तिवारी

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देहरादून – सब्बी धाणी देहरादून होने के चलते अलग राज्य बनने के बाद देहरादून की आबादी बेहिसाब बढ़ी है। जोगी वाला से लेकर नया गांव पेलियो तक कंकरीट का जंगल उग आया है और खेत-खलिहान के साथ साथ दून के मशहूर लीची और चाय के बगान गायब हो गए हैं।

ऐसे में आबादी बढ़ी और खुली अर्थव्यवस्था ने ईएमआई के जरिए हर घर में कार पहुंचा दी है। घर में कार तो पहुंच गई लेकिन आलम ये है कि 100 -डेढ सौ गज में बने घरों मे पार्किंग का इंतजाम नहीं है। गाड़ियां मुहल्ले के पार्कों में या कलोनी की सड़क पर नाली से सट कर खड़ी हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत तो तब होती है जब कार बाजार के लिए निकलती है।

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दून में जिस हिसाब से आबादी बढ़ी उससे कहीं तेज अतिक्रमण बढ़ा और सड़क की चौड़ाई कम होती गई।रही सही कसर बेहिसाब कारों ने पूरी कर दी। अब आलम ये है कि देहरादून शहर ही क्या देहरादून जिले के कस्बे और नगर सभी पार्किंग की किल्लत से दो-चार हो रहे हैं। चाहे ऋषिकेश हो या मसूरी, भानियावाला डोईवाला हो फिर विकासनगर हर जगह जनता परेशान हैं। आम आदमी की जीवन शैली बदली है लेकिन नगर और शहर का नहीं।

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ऐसे में देहरादून विकास प्राधिकरण के माथे पर शिकन की लकीर उभर आई हैं। हालांकि प्राधिकरण के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी की माने तो MDDA की नजर शहर के बढ़ते ट्रैफिक पर भी है और बिगड़ते हुए पर्यावरण पर भी। तिवारी कहते हैं बेशक बढ़ती आबादी बढता हुए ट्रैफिक देहरादून के लिए चिंता सबब हैं लेकिन MDDA पार्किंग के पुख्ता इंतजामात में जुटा हुआ है।

एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने बताया कि पार्किंग की समस्या को दूर करने के लिए अलग-अलग शहरों में नई पार्किंग विकसित की जा रही हैं।ऋषिकेश में नगर निगम के सहयोग से करीब डेढ़ हजार वाहनों की क्षमता वाली पार्किंग तैयार की जा रही है। वहीं देहरादून में तहसील परिसर में मल्टीलेवल पार्किंग का काम अंतिम चरण में है और जल्द ही जनता के लिए शुरू कर दी जाएगी। वहीं मसूरी में भी पार्किंग के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और जल्द निर्माण शुरू होगा।

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बंशीधर तिवारी ने कहा कि एमडीडीए का फोकस सिर्फ पार्किंग और ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण पर भी लगातार काम किया जा रहा है। इसके तहत बड़े स्तर पर वृक्षारोपण और जल संरक्षण के लिए वाटर हार्वेस्टिंग जैसे उपाय किए जा रहे हैं।