देहरादून – जिस किशोरी के गुमशुदा होने की रिपोर्ट 11 अक्टूबर 2020 को रायवाला थाने में लिखवाई गई थी ..उसे पुलिस ने दो दिन बाद यानि 13 अक्टूबर को नेपाली फार्म के पास सागर थापा के पास बरामद कर लिया। पुलिस ने सागर थापा के खिलाफ अगुवा करने और दुष्कर्म का आरोप लगाया। पॉक्सो एक्ट में मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल कर दिया ।
पेशी पर पेशी होती रही, तारीख पर तारीख लगती रही सागर थापा और उसके वकील माननीय न्यायालय के सामने हाजिर होते रहे । इधर बीते शुक्रवार को सुनवाई के दौरान लड़की ने पॉक्सो जज मंजू मुंडे के सामने आरोपी से पुरानी जान-पहचान कुबूल कर ली। इतना ही नही पीड़िता ने जज को बताया कि सागर के साथ उसका प्रेम प्रसंग था वहा पिछले डेढ साल से सागर थापा को जानती थी।
जिस रोज उसने घर छोड़ा था अपनी मर्जी से छोड़ा था और अपनी मर्जी से सागर के पास गई थी। सागर ने उसे घर छोड़ने के लिए उकसाया नहीं था। उन दोनो के बीच उस दौरान जो जिस्मानी ताल्लुकात बने थे उसके लिए अकेला सागर ही दोषी नहीं था बल्कि उसकी भी इसमें सहमति थी।
हालांकि कोर्ट ने ये जरूर माना कि जिस समय शारिरिक संबन्ध बने थे उस समय लड़की नबालिग थी। लेकिन माननीय न्यायाल य ने आरोपी सागर को अपहरण और दुष्कर्म के कथित आरोप से बरी कर दिया।
लेकिन सवाल ये है कि जो सच पीड़िता ने 6 साल बाद कुबूल किया वो पहली दफे क्यों नहीं कबूला। काश पहली बार ही सच कह देती तो आरोपी के वो छह साल बच सकते थे जो 6 साल उसने जेल के भीतर गुजारे।

