देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने अपने राजनीतिक भविष्य, पूर्व पीएस के खिलाफ ईडी की कार्रवाई और आगामी चुनाव मैदान में उतरने को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह अपनी 60 साल की राजनीतिक यात्रा पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के कलंक से मुक्त होकर ही विदा लेना चाहते हैं और इस लड़ाई को आक्रामक होकर लड़ेंगे।
अपनी राजनीतिक सक्रियता पर बात करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वह स्वास्थ्य कारणों से घर पर आराम कर रहे थे और डॉक्टरों ने उन्हें अधिक सीढ़ियां न चढ़ने की सलाह दी थी। लेकिन जब राजनीतिक विरोधियों ने उन पर झूठे आरोप लगाकर ललकारा, तो वह शांत नहीं बैठ सके और दोबारा जनता के बीच आ गए।
अपने तत्कालीन व्यक्तिगत सचिव चंदन सिंह जीना के परिसरों पर हुई ईडी की कार्रवाई पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में कांग्रेस भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार लड़ रही है। इस मुद्दे को कमजोर करने के लिए बीजेपी ने PMLA का राजनीतिक उपयोग करते हुए उनके पूर्व पीएस के घर ईडी भेजी, ताकि उनका नाम इसके साथ जोड़ा जा सके।
हरीश रावत ने कहा कि पूर्व पीएस चंदन सिंह जीना कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना मामला देख लेंगे और जो भी कानूनी प्रक्रिया होगी, वे उससे गुजरेंगे। लेकिन बीजेपी इस पूरे मामले में उनका नाम घसीटकर यह गलत संदेश देने की कोशिश कर रही है कि उनके कार्यकाल में नौकरियां बेची गईं।
अपने कार्यकाल की उपलब्धियों का बचाव करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उन्होंने अपने समय में 42 हजार से अधिक युवाओं को पूरी पारदर्शिता के साथ सरकारी नौकरियां दीं। उन्होंने ही अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का गठन किया और भर्ती बोर्ड बनाए थे, ताकि भर्ती प्रक्रियाओं में कोई गलत काम न हो सके।
पार्टी बदलने की अटकलों को खारिज करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि वह जीवन में दो चीजें कभी नहीं छोड़ सकते—एक कांग्रेस पार्टी और दूसरा गांधी-नेहरू परिवार। उन्होंने कहा कि 60 साल पहले उन्होंने जो कांग्रेस का तिरंगा थामा था, उसी झंडे में लिपटकर दुनिया से जाना चाहते हैं।
पार्टी में अकेले पड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उनके पास उनका विवेक, ईमानदारी और उत्तराखंड की जनता का साथ है। उन्होंने कहा कि विरोधियों के तानों का मुकाबला करना वह अच्छी तरह जानते हैं और समय आने पर सभी आरोपों का मुंहतोड़ जवाब देंगे।

