देहरादून। शासन ने नैनीताल जिले के ज्योलीकोट और भीमताल क्षेत्र में दूषित पानी पीने से हुई मौतों और दर्जनों लोगों के गंभीर रूप से बीमार पड़ने के बाद एक बेहद सख्त और त्वरित कदम उठाया हैष भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कुमाऊं परिक्षेत्र में पेयजल गुणवत्ता की पुख्ता निगरानी हेतु हल्द्वानी में एक अत्याधुनिक राज्य स्तरीय जल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित की जाएगी। सरकार के इस फैसले से स्थानीय नागरिकों और आसपास के ग्रामीण इलाकों के लोगों को शुद्ध पेयजल मिलने की उम्मीद बंध गई है, जिससे सीधे तौर पर आम जनता का स्वास्थ्य सुरक्षित हो सकेगा।
इस लैब के निर्माण कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने एक करोड़ 99 लाख रुपये की पहली किस्त की स्वीकृति भी जारी कर दी है. कुल दो करोड़ 20 लाख रुपये की लागत से बनने वाली इस आधुनिक प्रयोगशाला का निर्माण कार्य आगामी 31 मार्च 2027 तक पूरा कर लिया जाएगा।
हाल ही में नैनीताल के ज्योलीकोट में दूषित पानी के सेवन से दो लोगों की जान चली गई थी, जबकि भीमताल के गेठिया और सरियाताल क्षेत्र में भी गंदा पानी पीने से दर्जनों ग्रामीण डायरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों की चपेट में आ गए थे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने शुरुआती स्तर पर ही बड़ी कार्रवाई करते हुए पेयजल निगम व जल संस्थान के छह इंजीनियरों को निलंबित कर दिया था. इसके बाद भविष्य में ऐसी त्रासदियों की रोकथाम करने और कुमाऊं मंडल में पानी की सटीक व त्वरित जांच सुनिश्चित करने के लिए जल संस्थान की ओर से 27 अगस्त को हल्द्वानी में राज्य स्तरीय लैब स्थापित करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था. शासन स्तर पर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद अब इस पर तेजी से काम शुरू हो गया है।
अपर सचिव झरना कमठान की ओर से उत्तराखंड जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक को जारी शासनादेश के अनुसार, यह प्रयोगशाला पूरी तरह से तकनीकी और वैज्ञानिक मानकों पर आधारित होगी. इस पूरी योजना के अंतर्गत प्रयोगशाला के समस्त घटकों और संरचनाओं की आधुनिक जीआईएस मैपिंग कराई जाएगी। इसके अलावा, प्रयोगशाला के लिए खरीदे जाने वाले सभी टेस्टिंग उपकरण पूरी तरह मानकीकृत और उच्च गुणवत्तापरक होंगे, ताकि पानी की शुद्धता की जांच में किसी भी प्रकार की तकनीकी चूक न हो।

