एक दुकान, 200 से ज्यादा दावेदार…शराब कारोबार का बदला ट्रेंड!

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देहरादून। राजधानी देहरादून के शास्त्री नगर स्थित शराब की दुकान का आवंटन इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। दुकान हासिल करने के लिए 200 से ज्यादा लोगों ने आवेदन फॉर्म खरीदे हैं, जिससे आबकारी विभाग के अधिकारी भी हैरान हैं। एक ही दुकान के लिए इतनी बड़ी संख्या में दावेदार सामने आना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि शराब कारोबार को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है।

दरअसल, शास्त्री नगर स्थित शराब की दुकान के आवंटन की प्रक्रिया शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में लोग आबकारी विभाग की ओर पहुंचे और दुकान के लिए आवेदन फॉर्म खरीदे। जानकारी के मुताबिक अब तक 200 से अधिक फार्म बिक चुके हैं, जबकि आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह संख्या और बढ़ सकती है।

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एक दुकान के लिए इतनी बड़ी संख्या में आवेदन सामने आने से विभागीय स्तर पर भी इसे असामान्य रुचि के तौर पर देखा जा रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले कुछ सालों तक शराब कारोबार को लेकर तस्वीर इतनी उत्साहजनक नहीं मानी जाती थी।

कई कारोबारी लाइसेंस फीस, संचालन खर्च और अन्य व्यावसायिक परिस्थितियों के चलते इसे जोखिम वाला कारोबार बताते रहे हैं। ऐसे में किसी एक दुकान के लिए 100 से 120 आवेदन तक आना सामान्य माना जाता था। लेकिन शास्त्री नगर की दुकान के मामले में आवेदनकर्ताओं की संख्या 200 के पार पहुंचना बदलते कारोबारी माहौल की ओर इशारा कर रहा है।

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आबकारी विभाग के अधिकारियों की मानें तो इतनी बड़ी संख्या में आवेदन आना अपने आप में महत्वपूर्ण है। विभागीय स्तर पर इसे शराब कारोबार में बढ़ती रुचि के तौर पर देखा जा रहा है। खासतौर पर तब, जब किसी एक दुकान के लिए दावेदारों की संख्या सामान्य आंकड़े से लगभग दोगुनी हो जाए।

फायदे का सौदा मान रहे कारोबारी?

शराब की दुकान के लिए उमड़ी यह भीड़ कई सवाल भी खड़े कर रही है। आखिर ऐसा क्या बदला कि जिस कारोबार को कभी जोखिम और घाटे से जोड़कर देखा जाता था, उसी में अब बड़ी संख्या में लोग अपनी किस्मत आजमाने पहुंच रहे हैं? जानकारों के मुताबिक कारोबार में संभावित मुनाफे की उम्मीद, बिक्री की स्थिति और मौजूदा आबकारी व्यवस्था इसके पीछे अहम वजह हो सकती है।

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हालांकि किसी भी दुकान की वास्तविक लाभप्रदता कई व्यावसायिक कारकों पर निर्भर करती है। फिलहाल शास्त्री नगर की शराब की दुकान के लिए 200 से ज्यादा फार्म बिकना आबकारी महकमे के लिए भी एक अलग तरह का आंकड़ा बन गया है। एक दुकान और 200 से ज्यादा दावेदार यह तस्वीर बताती है कि शराब कारोबार को लेकर बाजार में धारणा जरूर बदली है। अब देखना होगा कि आवंटन प्रक्रिया पूरी होने के बाद किसके नाम दुकान का आवंटन होता है और कितने दावेदारों की उम्मीदें पूरी होती हैं।