देहरादून -अब देहरादून 70 -80 के दशक का नगर नहीं 21 वीं सदी का देहरादून शहर हैं..स्मार्ट सिटी की ओर बढ़ते देहरादून में अब किसी टॉकिज में सिनेमा नही दिखता मल्टी प्लेक्स पीवीआर में पॉपकॉर्न चबाते हुए मूवी देखी जाती है। अब यहां शॉपिग के लिए गली मुहल्ले की दुकानो में नहीं मॉल प्लाजा जैसी जगह जाया जाता है। बेहिसाब भीड़ बढ़ गई है अब देहरादून के धर्मपुर में खेतों से बासमती धान की महक नहीं महकती। अब उन खेतों में कंकरीट उग आई है। तिमंजली इमारतों की खिड़कियों पर टंगे एयरकंडीशन से बाहर की ओर गर्म हवा बहकती है।
मतलब पिछले 25 सालों में देहरादून का मिजाज बदल गया है क्योंकि आबादी बेहिसाब बढ़ी है। बढ़ी आबादी और बेहिसाब वाहनों के दबाव के चलते शहर की सड़कें संकरी हो गई है । जिनमे यातायात का सलीके से संचालन करवाना देहरादून पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती है। त्यौहारी सीजन में तो ये चैलेंज और भी बढ़ जाता है जब शहर के तकरीबन हर घर से ही नहीं बल्कि देहरादून शहर के आसपास के ग्रामीण इलाकों से भी जनता देहरादून में शॉपिंग के लिए निकल पड़ती।
बेहिसाब वाहनो के बोझ से दून की सड़के कराह उठती हैं और कदम-कदम पर थमें ट्रेफिक से देहरादून शहर का दम निकल जाता है। शहर के हालात से वाकिफ दून पुलिस ने शहर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, जाम से निजात दिलाने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कमर कस दी है। बताया जा रहा है कि हालात काबू करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा। वहीं व्यापारियों के साथ समन्वय बैठकें की जा रही हैं।
पुलिस की माने तो सीसीटीवी कैमरों और सर्विलांस के जरिए भी शहर की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। ताकि त्यौहारों के रंग किसी अप्रिय घटना से फीके न पड़ें। बताया जा रहा है कि दून पुलिस का फोकस भीड़ प्रबंधन, संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी और कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर रहेगा। पुलिस की कोशिश है कि लोग बिना किसी परेशानी के खरीदारी और त्योहारों का आनंद ले सकें और शहर में सुरक्षा के साथ यातायात व्यवस्था भी सुचारु बनी रहे।
शेखर चंद्र सुयाल, एस.पी. सिटी, देहरादून

